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प्रेमचंद के जीवन पर आधारित वस्तुनिष्ठ प्रश्न उत्तर premchand MCQ answer

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  घोष अघोष, अल्पप्राण और महाप्राण, द्वित्व व्यंजन वर्ण प्रेमचंद पर वस्तुनिष्ठ प्रश्न  Premchand MCQ answer  For compattive exam  प्रारंभिक जीवन और पृष्ठभूमि  * प्रेमचंद का जन्म कहाँ हुआ था?    * विकल्प: वाराणसी, लखनऊ, कानपुर    * उत्तर: वाराणसी  * प्रेमचंद का असली नाम क्या था?    * विकल्प: नवाब राय, धनपत राय, मुंशी रामचंद्र श्रीवास्तव    * उत्तर: मुंशी रामचंद्र श्रीवास्तव  * प्रेमचंद किस काल के लेखक थे?    * विकल्प: आदिकाल, भक्ति काल, आधुनिक काल    * उत्तर: आधुनिक काल  * प्रेमचंद की शिक्षा किस भाषा में हुई थी?    * विकल्प: हिंदी, उर्दू, अंग्रेजी    * उत्तर: मुख्यतः उर्दू  * प्रेमचंद ने अपनी पहली कहानी किस उम्र में लिखी थी?    * विकल्प: 12 साल, 15 साल, 18 साल    * उत्तर: 12 साल साहित्यिक योगदान  * प्रेमचंद को किस उपनाम से जाना जाता है?    * विकल्प: उपन्यास सम्राट, कहानी सम्राट, हिंदी साहित्य का पिता    * उत्तर: उपन्यास स...

गुरु गोबिंद सिंह जी: सिख धर्म के दसवें गुरु

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  Guru Gobind Singh Ji Sikh dharam ke daswen guru  गुरु गोबिंद सिंह जी: सिख धर्म के दसवें गुरु सिख धर्म के दसवें और अंतिम गुरु, गुरु गोबिंद सिंह जी एक महान योद्धा, कवि, दार्शनिक और आध्यात्मिक गुरु थे। उन्होंने सिख धर्म को एक लड़ाकू पंथ में परिवर्तित किया और खालसा पंथ की स्थापना की। जीवन परिचय  * जन्म: 22 दिसंबर, 1666, पटना, बिहार  * माता-पिता: गुरु तेग बहादुर और माता गुजरी  * बचपन का नाम: गोविंद राय गुरु गोबिंद सिंह जी ने छोटी उम्र से ही धार्मिक और सैन्य प्रशिक्षण प्राप्त किया। उन्होंने मुगल शासकों के अत्याचारों के खिलाफ सिखों का नेतृत्व किया और खालसा पंथ की स्थापना की। खालसा पंथ की स्थापना खालसा पंथ एक सिख सैनिक ब्रदरहुड है जिसे गुरु गोबिंद सिंह जी ने स्थापित किया था। खालसा पंथ के सदस्यों को खालसा कहा जाता है और वे सिख धर्म के सिद्धांतों का पालन करते हैं। गुरु गोबिंद सिंह जी का योगदान  * खालसा पंथ की स्थापना: सिख धर्म को एक लड़ाकू पंथ में परिवर्तित किया।  * सिख धर्म का प्रचार-प्रसार: सिख धर्म को विश्व स्तर पर फैलाया।  * साहित्य रचना: कई धार्मिक ग...

उपमा अलंकार, परिभाषा एवं उदाहरण, upama Alankar, upama ke ang, purnopama, luptopma, पूर्णोपमा, लुप्तोपमा अलंकार, इनके पहचान और उदाहरण

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अनुप्रास अलंकार पढ़ें  उपमा अलंकार, परिभाषा एवं उदाहरण, upama Alankar, upama ke ang, purnopama, luptopma, पूर्णोपमा, लुप्तोपमा अलंकार, इनके पहचान और उदाहरण उपमा अलंकार की परिभाषा -- जब किसी व्यक्ति अथवा वस्तु की विशेषता बताने के लिए उसकी समानता या तुलना उससे ज्यादा प्रसिद्ध व्यक्ति अथवा वस्तु से की जाती है, तब उपमा अलंकार होता है। दूसरे शब्दों में कहा जाता है कि किसी व्यक्ति अथवा वस्तु की तुलना उससे अधिक प्रसिद्ध व्यक्ति अथवा वस्तु से कराई जाती है, वहां उपमा अलंकार होता है। जैसे पीपल पात सरिस मन डोला। यहां देखिए, मन की तुलना पीपल के पत्ते से की गई है।  डोलने में पीपल पात अधिक प्रसिद्ध है।  उदाहरण -- सीता का मुख चन्द्रमा के समान सुन्दर है। यहां सीता का मुख चंद्रमा के समान सुन्दर बताया गया है। इसलिए उपमा अलंकार है। उपमा के अंग उपमा के चार अंग हैं -- उपमेय, उपमान, समान धर्म और वाचक शब्द। मधुमेह( diabetics ) की नई तकनीक दवा  उपमेय -- जिस व्यक्ति या वस्तु की समानता की जाती है उसे उपमेय कहते हैं। उपर्युक्त उदाहरण में सीता उपमेय है। उपमान -   जिस प्रसिद्ध वस्तु ...

Anupras Alankar अनुप्रास अलंकार : परिभाषा एवं उदाहरण, कक्षा नौवीं और दसवीं

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            अनुप्रास अलंकार     Bimal biography.xyz                      A way of knowledge                  Dr.Umesh Kumar Singh ********************"*** Anupras Alankar अनुप्रास अलंकार : परिभाषा एवं उदाहरण, कक्षा नौवीं और दसवीं Anupras Alankar kise kahte hai, anupras Alankar ke example, अनुप्रास अलंकार किसे कहते हैं। अनुप्रास अलंकार शब्द अलंकार है कि अर्थ अलंकार। मुदित महीपति मंदिर आए में कौन सा अलंकार है ?  तरनि तनुजा तट तमाल तरुवर वहु छाए में कौन अलंकार है ? वर्णों की आवृत्ति में कौन अलंकार होता है ? उत्तर - अनुप्रास अलंकार। अनुप्रास अलंकार शब्दों में पाया जाने वाला अलंकार है। जहां व्यंजनों की आवृत्ति के कारण काव्य में चमत्कार उत्पन्न होता है , वहां अनुप्रास अलंकार होता है।  उदाहरण देखिए  1.तरनि तनुजा तट तमाल तरुवर वहु छाए। 2. चारू चंद्र की चंचल किरणें खेल रही थी जल थल में। च और ल की आवृत्ति। 3. लट लटकनि मनो मत्त मधुप इन मादक...

Join Indian Air force As An Agniveer भारतीय वायुसेना में अग्निवीर बनने का मौका, शुरू हो गई प्रक्रिया

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भारतीय सेना में अग्निवीरों की नियुक्ति प्रक्रिया शुरू, जाने पूरी जानकारी   Join Indian Air force As An Agniveer भारतीय वायुसेना में अग्निवीर बनने का मौका, शुरू हो गई प्रक्रिया भारतीय वायुसेना आमंत्रित करता है आनलाइन आवेदन पत्र भारतीय - नेपाली अविवाहित युवकों से । Online registration date : from 1000h on  24 June 2022 to 1700h on 05 July 2022 Online examination date :  from 24 July 2022 onward. Webportal for registration : https://agnipathvayu.cdac.in ( available from 1000h on 24 June 2022 Date of birth blocked : born between 29 December 1999 and 29 June 2005  ( both date inclusive ) Registration and examination fee - Rs 250/- शैक्षणिक योग्यता, वेतनमान तथा अन्य जानकारी के लिए वायु सेना के अधिकारिक वेवसाईट को देखें https// Indian airforce.nic.in  भारतीय सेना में अग्निवीरों की नियुक्ति प्रक्रिया शुरू, जाने पूरी जानकारी  

Agniveer , अग्निवीरों की नियुक्ति प्रक्रिया शुरू, नियमावली की पूरी जानकारी

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भारतीय वायुसेना में अग्निवीर बनने के मौके, प्रक्रिया शुरू    Agniveer , अग्निवीरों की नियुक्ति प्रक्रिया शुरू, नियमावली की पूरी जानकारी। थल सेना ने अग्निपथ योजना के तहत अग्निवीरों की भर्ती के लिए एक जुलाई से आनलाइन आवेदन प्रक्रिया शुरू करने जा रहा है। एलान हो गया है। भर्ती पांच श्रेणियों में की जाएगी। शैक्षणिक योग्यता - अग्निवीरों के भर्ती की शैक्षणिक योग्यता आठवीं से बारहवीं तक रखी गई है। मापदंड एवं प्रकिया मापदंड में कोई बदलाव नहीं किया गया है। आवेदन के बाद अभ्यर्थियों को भर्ती रैलियों में सामिल होने की सूचना दी जाएगी। मापदंड उसी तरह रहेंगे जैसे पूर्व में सेना में भर्ती के लिए होते रहे हैं।  उम्र सीमा अग्निवीरों के आवेदन की अधिकतम उम्र सीमा 23 वर्ष है।  इसके लिए तिथि एक अक्टूबर 2022 कट आफ रखा गया है। अर्थात 01 अक्टूबर 2022 को अधिकतम उम्र सीमा 23 वर्ष है। इस तिथि को अभ्यार्थियों का उम्र 17.5 वर्ष से कम और 23 साल से अधिक नहीं होना चाहिए। भारतीय वायुसेना में अग्निवीर बनने के मौके, प्रक्रिया शुरू    अग्निवीरों की श्रेणियां अग्निवीरों की पांच श्रेणियां होगी। अ...

International yoga day,21 June 2022, अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस 21 जून 2022, निबंध एवं भाषण

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   International yoga day,21 June 2022, अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस 21 जून 2022, निबंध एवं भाषण                प्रमुख विषय सूची               Table of contents योग, अतीत में योग का ज्ञान,योग दिवस की शुरुआत,  योग दिवस कब मनाया जाता है, योग दिवस मनाने के उद्देश्य, प्रमुख योगासन के नाम,  योग भगाए रोग  योग की उत्पत्ति, योग के लाभ,  ब्रांड एंबेसडर आफ योग,  योग दिवस की देखरेख कौन करता है।  भारत में प्रथम योग दिवस ,  भगवत गीता में योग,  योग के जनक , महर्षि पतंजलि के अष्टांग योग,  निष्कर्ष। योग क्या है मानव और प्रकृति का अभिन्न एवं अटूट संबंध है। मानव प्रकृति के जितना निकट होगा उसकी उतनी ही उन्नति होगी। प्रकृति से दूर रहने के प्रयास में उसकी सुख शांति छिन जाएगी। वह क्रमशः पतन की ओर अग्रसर होता जाएगा। अतः जिन्हें इन बातों की अच्छी समझ है वह किसी न किसी रूप में प्रकृति से जुड़े रहने का प्रयास करते हैं। इन्हीं में से एक सार्थक प्रयास का नाम है योग, जोकि मनुष्य को प्रकृति स...

Shabd Shakti शब्द शक्ति किसे कहते हैं ? शब्द शक्ति के प्रकार, अभिधा, लक्षणा, व्यंजना

 Shabd Shakti शब्द शक्ति किसे कहते हैं ? शब्द शक्ति के प्रकार, अभिधा, लक्षणा, व्यंजना शब्द शक्ति किसे कहते हैं ? शब्द के अर्थ बोधक व्यापार को शब्द शक्ति कहते हैं अर्थात वह व्यापार जिससे शब्द के अंतर्निहित अर्थ पूर्ण व्यक्त होश उठते हैं। शब्द शक्ति के प्रकार शब्द शक्ति तीन प्रकार के होते हैं -- अभिधा, लक्ष्या और व्यंजना 1. अभिधा  अभिधा वह शब्द शक्ति है जिससे मुख्य अर्थ अथवा सीधे सीधे निश्चित अर्थ का बोध होता है। इसे मुख्या शक्ति या अग्रिमा शक्ति भी कहते हैं। उदाहरण के लिए यदि हम गदहा शब्द का उच्चारण करते हैं तो हमारे सामने एक निश्चित पशु का रूप उपस्थित हो जाता है। किसी महल, पहाड़ आदि का नहीं। यह शक्ति किसी शब्द का वही अर्थ बताता है जो परंपरा से हम सुनते आ रहे हैं। 2. लक्षणा मुख्यार्थ के बाधित होने पर रूढ़ी या प्रयोजन के सहारे उससे संबंधित अन्य अर्थ  ( लक्ष्यार्थ ) बोधक व्यापार को लक्षणा शब्द शक्ति कहते हैं। वस्तुतः लक्ष्यार्थ का वास्तविक अर्थ न होकर आरोपित अर्थ होता है। यदि कहा जाए कि राम गदहा है। तो यहां गदहा पशु विशेष नहीं है, क्योंकि राम पशु नहीं आदमी है। इसलिए समझने वा...

जायसी के पद्मावत की कथानक रूढी, जायसी की काव्य दृष्टि, जायसी के पद्मावत में लोकतत्व और प्रेम भावना, Jayasi poet

 जायसी के पद्मावत की कथानक रूढी, जायसी की काव्य दृष्टि, जायसी के पद्मावत में लोकतत्व और प्रेम भावना, Jayasi poet  कथानक रूढी --   कवि परंपरा में विशेषकर प्रेम काव्य परंपरा में कुछ काव्य रूढ़ियां चली आ रही थी । जैसे,  किसी पक्षी द्वारा प्रेम संदेश भेजना, प्रेम पात्र माशूका में परमात्मा का साक्षात्कार करना , प्रेमी साधक के मार्ग की अतिशय कठिनाइयों का वर्णन करना,  किसी अलौकिक सहायता द्वारा प्रेम पात्र की प्राप्ति होना आदि । जायसी के पद्मावत में हमें प्रायः समस्त काव्य रूढ़ियों का निर्वाह मिल जाता है।  ( क ) सिंघल द्वीप के राजा गंधर्व सेन की कन्या पद्मावती अद्वितीय सुंदरी थी। हीरामन नामक सुआ चित्तौड़ के राजा रतन सेन से पद्मावती के सौंदर्य का वर्णन करता है। वर्णन सुनकर राजा मूर्छित हो जाता है। अंत में उसकी खोज में योगी बन कर निकल पड़ता है। हीरामन तोता गुरु की भूमिका निभाता है। गुरु सुआ जेहि पंथ दिखावा । बिनु सतगुरु को निर्गुण पावा।। (ख ) योगी रतनसेन के साथ सोलह हजार कुंवर योगियों के वेश में चलते हैं। मार्ग में उन्हें अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। म...

संगम, बलाघात, अनुतान Sangam, Balaghat,Anutan, hindi grammar

 संगम, बलाघात, अनुतान Sangam, Balaghat,Anutan, hindi grammar संगम -- किसी शब्द के उच्चारण करते समय दो ध्वनियों के बीच किए जाने वाले हल्के विराम को संगम कहते हैं। दो भिन्न स्थान पर विराम  ( संगम) से भिन्न अर्थ सामने आते हैं। जैसे - सिरका - एक प्रकार का तरल पदार्थ। सिर + का -- सिर से संबंधित। कम बल -- कम बल वाला । कंबल -- जाड़े में ओढ़ने वाला। मनका -- माला का मोती। मन + का -- मन से संबंधित। बलाघात -- ( स्वराघात ) -- शब्दों के उच्चारण करते समय अक्षर विशेष पर जो विशेष बल पड़ता है उसे बलाघात कहते हैं। इसी प्रकार कभी कभी एक वाक्य के शब्द विशेष पर भी बल पड़ता है ‌। यही प्रक्रिया बलाघात है। अक्षर के स्वर पर बल पड़ने के कारण इसे स्वराघात कहते हैं। बलाघात दो प्रकार से होता है -- 1. शब्द बलाघात 2. वाक्य बलाघात 1. शब्द बलाघात -- शब्द बलाघात से अर्थ में परिवर्तन नहीं होता है। इस प्रकार के बलाघात में शब्द के किसी एक अक्षर पर विशेष बल पड़ता है। जैसे इंद्र शब्द में संयुक्त अक्षर से पहले वाले अक्षर ई पर जोर दिया गया है। इसी प्रकार कमल शब्द के उच्चारण में म पर अधिक बल पड़ता है । धोबी का कुत्...

वर्णों का उच्चारण स्थान, varno ka uchchatan athan, अक्षर , hindi grammar

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 वर्णों का उच्चारण स्थान, varno ka uchchatan athan, अक्षर , hindi grammar मानव मुख से ध्वनियां मुख के विभिन्न भागों से उच्चरित और अनुशासित होती हैं। विभिन्न वर्णों के उच्चारण स्थान अलग अलग होते हैं। यहां वर्णों के उच्चारण स्थान की जानकारी प्राप्त करें। कंठ -- अ आ क ख ग घ ङ ह और विसर्ग। तालु -- इ ई च छ ज झ ञ य और श। मूर्धा -- ऋ ट ठ ड ढ ण र और ष। दंत -- त थ द ध न ल और स। ओठ -- उ ऊ प फ ब भ म। कंठ - तालु -- ए ऐ। कंठ - ओष्ठ -- ओ औ। दंतोष्ठय -- व। अक्षर किसे कहते हैं ? वर्णों की वह लघुतम इकाई जिसका उच्चारण सांस के एक झटके से हो जाए उसे अक्षर कहते हैं। जैसे - आ, जी, जा, ले, मां, उठ आदि। सभी स्वर वर्णों को अक्षर कहते हैं क्योंकि उनका उच्चारण सांस के एक झटके में ही हो जाता है। लेकिन व्यंजन वर्णों के साथ जब तक कोई स्वर नहीं लगता है तब तक वह अक्षर नहीं बनता है। जैसे - खा, क्या। हिन्दी में एकाक्षरी से लेकर अनेकाक्षरी तक शब्द रचना संभव है, ‌जैसे -- एकाक्षरी -- खा, आ, ओ, जा, गा, हां। दो अक्षरी शब्द -- आओ, कवि, खाया, शाखा, पूजा। तीन अक्षरी शब्द -- आइए, जाइए, कविता, बेचारा, पाइए। चार अक्षरी शब्द -...

घोष - अघोष, अल्पप्राण -- महाप्राण , द्वित्व व्यंजन वर्ण , Ghosh, aghosh, alappran mahapran, dwit byanjan barn, consonant

  घोष - अघोष, अल्पप्राण -- महाप्राण , द्वित्व व्यंजन वर्ण , Ghosh, aghosh, alappran mahapran, dwit byanjan barn, consonant स्वर तंत्रियों के कंपन के आधार पर  व्यंजन वर्ण के भेद  घोष -- जिन वर्णों के उच्चारण के समय स्वर तंत्रियां कंपित होकर गूंज उत्पन्न करतीं हैं , उन्हें घोष वर्ण कहते हैं। प्रत्येक वर्ग का तीसरा , चौथा, पांचवां वर्ण अंतस्थ तथा सभी स्वर वर्ण घोष हैं। अ आ इ ई उ ऊ ए ऐ ओ औ ग घ ङ, ज झ ञ, द ध न, ब भ म, य र ल व ह अघोष -- जिन वर्णों के उच्चारण करते समय वायु स्वर तंत्रियों  के बीच कंपित नहीं होती है, उन्हें अघोष वर्ण कहते हैं। प्रत्येक वर्ग का पहला दूसरा वर्ण अघोष वर्ण हैं। जैसे -- क ख च छ ट ठ त थ प फ श ष स। अल्पप्राण और महाप्राण अल्पप्राण -- जिन वर्णों के उच्चारण में श्वास पूरव से अल्प मात्रा में निकलता है और हकार जैसी ध्वनि नहीं निकालती है, उन्हें अल्पप्राण वर्ण कहते हैं। प्रत्येक वर्ग का पहला,तीसरा और पांचवां वर्ण अल्प प्राण हैं। क ग ङ, च, ज, ञ, ट ड ण, त द न, प फ म य र ल व। महाप्राण -- जिन वर्णों के उच्चारण में श्वास अधिक मात्रा में निकले और हकार जैसी ...

वर्ण किसे कहते हैं ? ( परिभाषा, उदाहरण,भेद ), वर्णमाला, varn kise kahte hai, varnamala, Hindi grammar

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घोष अघोष, अल्पप्राण और महाप्राण, द्वित्व व्यंजन वर्ण                         Bimal biography.xyz   वर्ण, वर्णमाला, हिन्दी के वर्णमाला (हिन्दी व्याकरण ) warn, Hindi warn, Hindi warnmala, Hindi letter. Swarn warn, wayanjan varn. वर्ण किसे कहते हैं ? वर्ण  के उदाहरण, वर्ण के भेद, ह्रस्व स्वर, दीर्घ स्वर, प्लूत स्वर। वर्ण भाषा की सबसे लघुतम इकाई है, इसलिए इसके खंड या टुकड़े नहीं किए जा सकते। राम शब्द की ध्वनियों को खंड और विश्लेषण करने पर निम्नलिखित ध्वनियां प्राप्त होती है । र + आ + म् +अ । इन चार ध्वनियों के और खंड संभव नहीं है। इसलिए यह चारों वर्ण है । इसी प्रकार सीता शब्द के खंड और विश्लेषण पर स्+अ+ई+त्+अ +आ ध्वनियां प्राप्त होगी।  यह अखंडित ध्वनियां ही वर्ण है। ' वह मूल ध्वनि जिसके खंड ना हो सके वर्ण कहलाती हैं। ' उदाहरण - अ,ई,उ,क्,च् ,प् आदि। वर्णमाला किसे कहते हैं ? Warnmala kise kahte hai ? वर्णों के क्रमिक समूह को वर्णमाला कहते हैं। हिन्दी देवनागरी वर्णमाला स्वर - अ,आ,इ ,ई,उ,ऊ,ऋ,ए,ऐ,ओ,औ , = 11 व्यंजन -क,ख,ग,...

चंद्रगुप्त विक्रमादित्य, (चंद्रगुप्त द्वितीय) Chandragupta dwitiya

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 चंद्रगुप्त द्वितीय , चंद्रगुप्त विक्रमादित्य, गुप्त साम्राज्य, शासन, सैनिक अभियान, चंद्रगुप्त द्वितीय के शासन व्यवस्था, धर्म, सिक्के, Chandragupta dwitiya, चंद्रगुप्त द्वितीय का जीवन परिचय, चंद्रगुप्त द्वितीय का जन्म कब हुआ, चंद्रगुप्त द्वितीय के पिता कौन थे, चंद्रगुप्त द्वितीय की राजधानी कहां थी , चंद्रगुप्त द्वितीय का शासन काल, चंद्रगुप्त द्वितीय के सिक्के, चंद्रगुप्त द्वितीय की पत्नी का क्या नाम था, चंद्रगुप्त द्वितीय की पुत्री कौन थी, चंद्रगुप्त द्वितीय की उपाधि, चंद्रगुप्त द्वितीय के नौ रत्नों के नाम बताएं, चंद्रगुप्त द्वितीय ने कौन सा संवत् चलाया, चंद्रगुप्त द्वितीय ने विक्रमादित्य की उपाधि कब धारण की ? चंद्रगुप्त द्वितीय के दरबारी कवि कौन थे ? चंद्रगुप्त द्वितीय भारतीय इतिहास में क्यों अमर है ?   भारत के इतिहास में गुप्त काल को स्वर्ण काल माना जाता है। इस काल खंड में शासन व्यवस्था, कला, सभ्यता संस्कृति, साहित्य आदि का भरपूर विकास हुआ। समुद्रगुप्त का पुत्र चंद्रगुप्त द्वितीय बड़ा प्रतापी राजा हुए। इनकी राजधानी उज्जयिनी थी। चंद्रगुप्त द्वितीय का शासन काल 375 से 414 ई मान...

हिंदी भाषा और लिपि Hindi language, script

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 हिंदी भाषा संक्षिप्त परिचय , Hindi language and script,lipi, bhasha भाषा किसे कहते हैं, भाषा की परिभाषा, भाषा की विशेषताएं, भाषा की उत्पत्ति, भाषा के प्रकार, मानक भाषा भाषा किसे कहते हैं ? मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है । समाज में रहकर उसे विभिन्न प्रकार के कार्यों और उत्तरदायित्वों का निर्वहन करना पड़ता है । इस क्रम में वह अन्य लोगों के साथ विचार-विमर्श करता है तथा अपने विचारों का आदान प्रदान करता है। प्रारंभ में यह कार्य संकेतों के द्वारा ही संपन्न हो जाता होगा क्योंकि तब उनकी आवश्यकताएं सीमित थी, किंतु धीरे धीरे मानवीय आवश्यकताओं में वृद्धि हुई और एक ऐसे माध्यम की आवश्यकता महसूस होने लगी जिसके द्वारा विचारों का पूर्ण आदान-प्रदान संभव हो सके । चिंतनशील मानव मन विचार अभिव्यक्ति के लिए व्याकुल हो उठा और कालांतर में उसके मुख से वाणी रूपी सार्थक ध्वनियों की धारा प्रवाहित हो गई। इस प्रकार मनुष्य धीरे-धीरे बोलकर अथवा लिखकर अपने अपने विचारों को दूसरे लोगों तक संप्रेषित करने लगा। वास्तव में मनुष्य ही ईश्वर की वह अनुपम कृति है जिसे मां बागेश्वरी ने भावाभिव्यक्ति  के लिए वाणी की विभूति ...

महादेवी वर्मा का जीवन परिचय, A biography of Mahadevi Varma

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  महादेवी वर्मा का जीवन परिचय, A biography of Mahadevi Verma महादेवी वर्मा का जन्म, महादेवी वर्मा की शिक्षा - दीक्षा, महादेवी वर्मा की प्रमुख रचनाएं, पुरस्कार आधुनिक मीरा के नाम से विख्यात छायावाद की प्रमुख स्तंभ महादेवी वर्मा का आविर्भाव हिंदी जगत के लिए महानतम उपलब्धि है । इनका जन्म 1907 ईस्वी में उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद में एक धार्मिक और संपन्न परिवार में हुआ था। इनके पिता एक नामी गिरामी वकील थे और मां ममता की साक्षात मूर्ति गृहस्थ स्त्री।  महादेवी जी की शिक्षा पहले जबलपुर और फिर इलाहाबाद में हुई । सन 1932 में इन्होंने प्रयाग विश्वविद्यालय से संस्कृत में एम.ए. की उपाधि प्राप्त की। वे प्रयाग महिला विद्यापीठ की आचार्या नियुक्त हुई और बाद में वहीं कुलपति भी बनी। विक्रम , कुमायूं तथा दिल्ली विश्वविद्यालयों ने इन्हें डी लीट की मानद उपाधि प्रदान की है । इनकी साहित्यिक ,शैक्षिक तथा सामाजिक सेवाओं के लिए भारत सरकार ने इन्हें पद्मभूषण अलंकार से विभूषित किया है। उनकी काव्य कृति यामा के लिए उन्हें 1982  ई में ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। उत्तर प्रदेश हिंदी संस्था...

सैयद अमीर अली 'मीर' हिन्दी कवि की जीवनी, A biography of Saiyad Amir Ali Meer, Hindi poet.

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 सैयद अमीर अली 'मीर' हिन्दी कवि की जीवनी, A biography of Saiyad Amir Ali Meer, Hindi poet.  हिन्दी साहित्य  के द्विवेदी युग के कवि सैयद अमीर अली मीर       ( 1873 - 1937 ) का जन्म सागर मध्यप्रदेश में हुआ था। बचपन में ही पिता की मृत्यु हो जाने के कारण यह अपने चाचा के पास सागर जिले के देवरी नामक गांव में रहने लगे। साहित्य के क्षेत्र में इनका प्रवेश समस्या पूर्ति के कारण हुआ। इनके कारण देवरी में अमीर मंडल कवि समाज की स्थापना हुई। सैयद अमीर अली मीर हिंदी के बहुत प्रेमी थे और हिंदी को राष्ट्रभाषा बनाने के समर्थक थे ।रामचरितमानस के प्रति इनका विशेष अनुराग था। "उलाहना पंचक" और "अन्योक्ति शतक " इनकी मुख्य काव्य कृतियां हैं। सैयद अमीर अली मीर की कविताओं के मुख्य विषय ईश्वर भक्ति और देश प्रेम है ।इनकी भाषा परिमार्जित खड़ी बोली है ।द्विवेदी युग के यह प्रमुख कवि माने जाते हैं।

A biography of famous poet Jayashankar Prasad, जयशंकर प्रसाद की जीवनी, छायावाद के प्रवर्तक कवि जयशंकर प्रसाद

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 A biography of famous poet Jayashankar Prasad, जयशंकर प्रसाद की जीवनी, छायावाद के प्रवर्तक कवि जयशंकर प्रसाद हिंदी साहित्य के छायावाद के प्रवर्तक कवि जयशंकर प्रसाद का जन्म 1889 ई में वाराणसी, उत्तर प्रदेश में हुआ था इनके पिता का नाम बाबू देवक प्रसाद था। इनका परिवार सुघनी साहू के नाम से प्रसिद्ध था । प्रसाद जी काशी के प्रसिद्ध क्वींस कॉलेज में पढ़ने गए थे परंतु पिता की आकस्मिक मृत्यु और आर्थिक कठिनाइयों के कारण आठवीं कक्षा से आगे नहीं पढ़ सके। बाद में हिंदी, संस्कृत, फारसी, उर्दू आदि भाषाओं का अध्ययन घर पर ही किया।  जयशंकर प्रसाद जी ने वेद उपनिषद के साथ इतिहास पुराण और दर्शन का गहन अध्ययन किया था । उनकी पत्नी का निधन युवावस्था में ही हो गया था , जिसकी वेदना का प्रभाव प्रसाद की काव्य रचनाओं में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है। जयशंकर प्रसाद जी लंबी बीमारी के बाद सन 1937 में स्वर्ग सिधार गए। काव्यगत विशेषताएं --  छायावादी कवि होने के कारण प्रसाद जी के काव्य में छायावादी कविता के सभी गुण जैसे काल्पनिकता, प्रकृति प्रेम, देश प्रेम, सौंदर्य वर्णन आदि मिलते हैं । प्रसाद जी के काव्...

बाबू वीर कुंवर सिंह जीवन परिचय, A biography of Babu Veer Kunwar Singh

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 बाबू वीर कुंवर सिंह जीवन परिचय, A biography of Babu Veer Kunwar Singh सन 1857 ई के स्वतंत्रता संग्राम के महानायक बाबू वीर कुंवर सिंह बिहार के शाहाबाद जिले के जगदीशपुर में सन् 1782 ई में हुआ था। इनके पिता का नाम साहब जादा सिंह और माता का नाम पंचरत्न कुंवर था । बाबू साहब जादा सिंह जगदीशपुर रियासत के जमींदार थे। बाबू कुंवर सिंह ने हिंदी , संस्कृत , फारसी आदि की शिक्षा घर पर ही प्राप्त की थी लेकिन इनका मन पढ़ाई से अधिक घुड़सवारी, तलवारबाजी, कुश्ती आदि साहसिक कार्यों में लगता था। सन् 1827 में पिता की मृत्यु के बाद बाबू कुंवर सिंह ने रियासत की जिम्मेदारी संभाली । उन दिनों ब्रिटिश हुकूमत का अत्याचार चरम पर था। कृषि, उद्योग , व्यापार आदि का बहुत बुरा हाल था । लोग त्राहि-त्राहि कर रहे थे। राज रजवाड़ों का भी बुरा हाल था। इससे ब्रिटिश सत्ता के खिलाफ देशभर में असंतोष फैल गया था। ऐसी स्थिति में बाबू वीर कुंवर सिंह ने ब्रिटिश हुकूमत से लोहा लेने का संकल्प लिया। उन दिनों जगदीशपुर के जंगलों में बसूरिया बाबा नामक एक प्रसिद्ध संत रहते थे । कहते हैं, उन्होंने ही बाबू वीर कुंवर सिंह को देश भक्ति और स...

तानसेन और राग दीपक की कहानी, अकबर दरबार के नवरत्नों में एक महत्वपूर्ण रत्न तानसेन, तानसेन के गुरु स्वामी हरिदास जी, तानसेन की मौत कैसे हुई, राग दीपक की ज्वाला से तानसेन को किसने बचाया। Tansen aur rag Deepak,

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  तानसेन और राग दीपक की कहानी, अकबर दरबार के नवरत्नों में एक महत्वपूर्ण रत्न तानसेन, तानसेन के गुरु स्वामी हरिदास जी, तानसेन की मौत कैसे हुई, राग दीपक की ज्वाला से तानसेन को किसने बचाया।  Tansen aur rag Deepak,  तानसेन का नाम कौन नहीं जानता ? तानसेन अकबर के दरबार के  नवरत्नों में एक महान रत्न थे। तानसेन स्वामी हरिदास के शिष्य थे। कहते हैं , तानसेन पांच साल की अवस्था तक गूंगे थे, स्वामी हरिदास जी ने उन्हें गीत संगीत की शिक्षा दी। संगीत की दुनिया में तानसेन ने इतना नाम कमाया कि महान मुगल बादशाह अकबर ने उन्हें अपने दरबार में महत्वपूर्ण रत्न बना दिया। बादशाह अकबर उन्हें बहुत मानते थे। इस बात से अन्य दरबारी तानसेन से जलने लगे। उन्होंने कुछ ऐसा षड्यंत्र रचा कि तानसेन खुद राग दीपक गाकर जल मरे। लेकिन तानसेन ने बुद्धि से इस षड्यंत्र को विफल कर तो दिया, परन्तु ---! पूरी कहानी आगे पढ़े। तानसेन बादशाह अकबर के बहुत प्रिय दरबारी बन गये थे। इनका असली नाम था तनु पांडे था। तानसेन का जन्म ग्वालियर में हुआ था। बादशाह उनकी बड़ी कद्र करते थे। राजकाज में भी उनकी बड़ी महत्वपूर्ण भूमिका होत...