वर्ण किसे कहते हैं ? ( परिभाषा, उदाहरण,भेद ), वर्णमाला, varn kise kahte hai, varnamala, Hindi grammar




                        Bimal biography.xyz

 


वर्ण, वर्णमाला, हिन्दी के वर्णमाला (हिन्दी व्याकरण ) warn, Hindi warn, Hindi warnmala, Hindi letter. Swarn warn, wayanjan varn.


वर्ण किसे कहते हैं ? वर्ण  के उदाहरण, वर्ण के भेद, ह्रस्व स्वर, दीर्घ स्वर, प्लूत स्वर।


वर्ण भाषा की सबसे लघुतम इकाई है, इसलिए इसके खंड या टुकड़े नहीं किए जा सकते। राम शब्द की ध्वनियों को खंड और विश्लेषण करने पर निम्नलिखित ध्वनियां प्राप्त होती है । र + आ + म् +अ । इन चार ध्वनियों के और खंड संभव नहीं है। इसलिए यह चारों वर्ण है । इसी प्रकार सीता शब्द के खंड और विश्लेषण पर स्+अ+ई+त्+अ +आ ध्वनियां प्राप्त होगी।  यह अखंडित ध्वनियां ही वर्ण है। ' वह मूल ध्वनि जिसके खंड ना हो सके वर्ण कहलाती हैं। ' उदाहरण - अ,ई,उ,क्,च् ,प् आदि।


वर्णमाला किसे कहते हैं ? Warnmala kise kahte hai ?

वर्णों के क्रमिक समूह को वर्णमाला कहते हैं।

हिन्दी देवनागरी वर्णमाला

स्वर - अ,आ,इ ,ई,उ,ऊ,ऋ,ए,ऐ,ओ,औ , = 11

व्यंजन -क,ख,ग,घ,ड.

च,छ,ज,झ,ञ,

ट, ठ,ड,ढ, ण,

त, थ, द, ध,न,

प, फ,ब,भ, म,

य, र, ल,व,श,ष, स , ह,

अयोगवाह

अनुस्वार --- अं

विसर्ग ---    अ:

विशिष्ट ध्वनि -- ड, ढ 

आगत स्वर -- ऑ

आगत व्यंजन -- ॹ,  फ 

संयुक्त व्यंजन -- क्ष,त्र, ज्ञ,श्र,

चकमा देना मुहावरे

वर्णों के कितने  प्रकार होते हैं ?

वर्ण दो प्रकार के होते हैं--

स्वर वर्ण और व्यंजन वर्ण

1. स्वर वर्ण -- वे वर्ण जिनका उच्चारण बिना किसी दूसरे वर्ण की सहायता के हो। वे व्यंजन वर्ण के उच्चारण में सहायक भी होते हैं, उन्हें स्वर वर्ण कहे जाते हैं। स्वर वर्ण की संख्या 11 है।  अ,आ, इ, ई, उ, ऊ, ऋ, ए, ऐ, ओ,औ ।

स्वर के भेद



https://www.bimalhindi.in/2024/11/application-for-school-leaving.html


मात्रा के आधार पर स्वर के तीन भेद होते हैं --

1.ह्रस्व स्वर 2. दीर्घ स्वर 3. प्लूत स्वर

1. ह्रस्व स्वर -- जिन स्वरों के उच्चारण में कम अर्थात एक मात्रा का समय लगता है उन्हें ह्रस्व स्वर कहते हैं। इन्हें मूल स्वर भी कहा जाता है। उदाहरण - अ,इ,उ     

२. दीर्घ स्वर --जिन स्वरों के उच्चारण में  ह्रस्व स्वर से अधिक अर्थात दो मात्रा का समय लगता है, उसे दीर्घ स्वर कहते हैं। उदाहरण - आ,ई,ऊ,ए,ऐ ओ, औ।

3. प्लूत -- जिन स्वरों के उच्चारण में दीर्घ से भी अधिक, अर्थात तीन गुना समय लगे, उसे प्लूत कहते हैं। उदाहरण ओऊम,राऽम



जीभ की उच्चता के आधार पर स्वर भेद कितने हैं ?

1. अग्र स्वर -- इनके उच्चारण में जिभ का अगला भाग ऊपर उठता है।। ये हैं -- इ, ई, ए, ऐ
2. पश्च भाग -- इनके उच्चारण में जिम का पिछला भाग ऊपर उठता है। जैसे - आ, ऊ ओ,और,ऑ
3. मध्य भाग -- इसके उच्चारण में जिभ का मध्य भाग थोड़ा ऊपर उठता है। उदाहरण - अ

मुख खुलने के आधार पर स्वर के भेद कितने हैं ?

1. संवृत -- इसमें मुख कम खुलता है। जैसे - इ, ई,उ,ऊ
2. अर्ध संवृत -- इसमें मुख संवृत से थोड़ा अधिक खुलता है। जैसे - ए, ओ।
3. अर्ध निवृत -- मुख अर्ध संवृत से थोड़ा अधिक खुलता है, पर पूरा नहीं खुलता है। जैसे - अ, ऑ
4. विवृत -- इसमें मुख पूरा खुलता है । जैसे -- आ, ऐ, ऑ।


ओंठ के गोलाई के आधार पर स्वर भेद

1. गोलित ( वृताकार) -- उ, ऊ,ओ, औ।
2. अगोलित ( अवृताकार) -- अ,आ, इ, ई,ए, ऐ।


व्यंजन वर्ण किसे कहते हैं ?

 जिन वर्णों का उच्चारण स्वर  वर्ण की  सहायता से हो उन्हें व्यंजन वर्ण कहते हैं जैसे क, च, ट, प, म, इत्यादि। प्रत्येक व्यंजन वर्ण में अ स्वर की ध्वनि छिपी रहती है। जैसे - क्+ अ = क, ख्+अ =ख।

व्यंजन वर्ण के भेद 

उच्चारण में विविधता के आधार पर व्यंजन वर्ण के तीन भेद होते हैं --
1. स्पर्श व्यंजन, 2. अंतस्थ व्यंजन 3. उष्म व्यंजन


1. स्पर्श -- कवर्ग -- क,ख, ग, घ, ड. 

              चवर्ग -- च, छ, ज, झ, ञ

              टवर्ग -- ट,ठ,ड,ढ, ण

              तवर्ग -- त, थ, द, ध, न

              पवर्ग -- प, फ, ब, भ, म           = 25

 2. अंतस्थ --- य,र,ल, व                           =      4

 3.  उष्म --- श, ष, स, ह                         =      4


प्रयत्न के आधार पर व्यंजन वर्ण के आठ भेद हैं --

1. स्पर्शी - जिन व्यंजन वर्णों के उच्चारण करते समय वायु उच्चारण अवयवों से आपस में स्पर्श करती हैं, वह स्पर्श व्यंजन कहलाती है। उदाहरण--  क ख ग घ ट ठ ड ढ त थ द ध प फ ब भ ।

2. संघर्षी -- जिन व्यंजन वर्णों के उच्चारण करते समय वायु दो उच्चारण 

अवयवों के बीच से संघर्ष करती हुई निकलती है , उन्हें संघर्षी व्यंजन कहते हैं। उदाहरण - श ष स ह ॹ फ।

3. स्पर्श संघर्षी -- इन व्यंजन वर्णों के उच्चारण करते समय जीभ उच्चारण स्थान का स्पर्श करती है और थोड़ी संघर्ष करती हुई वायु को बाहर निकलने देती है। च छ ज झ वर्ण इसके उदाहरण हैं।

4. नासिक्य -- प्रत्येक व्यंजन वर्ण का पांचवां वर्ण नासिक्य कहलाता है , क्योंकि इनके उच्चारण में वायु मुख के अतिरिक्त नासिका से भी निकलती है। जैसे - ङ , ञ, ण, न, म।

5. पार्श्विक -- जिन व्यंजन वर्णों के उच्चारण में जिभ तालू को छूती है परन्तु बगल का रास्ता खुला रहता है। और हवा निकल जाती है। इसे पार्श्विक व्यंजन कहते हैं। हिन्दी में ल ही एकमात्र ऐसा व्यंजन वर्ण है।

6. प्रकंपी -- प्रकंपी का अर्थ है कंपनी करने वाला। र व्यंजन वर्ण के उच्चारण में जीभ की नोक मसूड़े के पास भीतर से आती हुई वायु के प्रवाह के कारण कांपती है। र प्रकंपी व्यंजन वर्ण है।

7. उत्क्षिप्त -- कुछ व्यंजन वर्णों के उच्चारण में जिभ की नोक ऊपर उठाकर झटके से नीचे फेंक दी जाती है। इन्हें उत्क्षिप्त व्यंजन वर्ण कहा जाता है।  ड और ढ ऐसे ही वर्ण हैं।

8. संघर्षहीन  -- इन्हें अर्ध स्वर भी कहा जाता है। ऐसे वर्णों के उच्चारण में हवा बिना संघर्ष के बाहर निकल जाती है । य व ऐसे ही वर्ण हैं। 



घोष अघोष, अल्पप्राण और महाप्राण, द्वित्व व्यंजन वर्ण


टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

प्रेमचंद के जीवन पर आधारित वस्तुनिष्ठ प्रश्न उत्तर premchand MCQ answer

बाबू वीर कुंवर सिंह जीवन परिचय, A biography of Babu Veer Kunwar Singh

सैयद अमीर अली 'मीर' हिन्दी कवि की जीवनी, A biography of Saiyad Amir Ali Meer, Hindi poet.