Anupras Alankar अनुप्रास अलंकार : परिभाषा एवं उदाहरण, कक्षा नौवीं और दसवीं
अनुप्रास अलंकार
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Dr.Umesh Kumar Singh
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Anupras Alankar अनुप्रास अलंकार : परिभाषा एवं उदाहरण, कक्षा नौवीं और दसवीं
Anupras Alankar kise kahte hai, anupras Alankar ke example, अनुप्रास अलंकार किसे कहते हैं। अनुप्रास अलंकार शब्द अलंकार है कि अर्थ अलंकार। मुदित महीपति मंदिर आए में कौन सा अलंकार है ? तरनि तनुजा तट तमाल तरुवर वहु छाए में कौन अलंकार है ? वर्णों की आवृत्ति में कौन अलंकार होता है ? उत्तर - अनुप्रास अलंकार।
अनुप्रास अलंकार शब्दों में पाया जाने वाला अलंकार है। जहां व्यंजनों की आवृत्ति के कारण काव्य में चमत्कार उत्पन्न होता है , वहां अनुप्रास अलंकार होता है।
उदाहरण देखिए
1.तरनि तनुजा तट तमाल तरुवर वहु छाए।
2. चारू चंद्र की चंचल किरणें खेल रही थी जल थल में। च और ल की आवृत्ति।
3. लट लटकनि मनो मत्त मधुप इन मादक मधुहि पियें। ल, म की आवृत्ति।
ध्यान रहे कि वर्णों की आवृत्ति में भी कोई नियम होना चाहिए। चाहे तो वह शब्द के आरंभ में करे, या मध्य में या अंत में। कुछ और उदाहरण देखिए --
* कल कानन कुण्डल मोर पंखा उर पै बनमाल बिराजति है।
* कौन किंकिनि नूपूर धुनि सुनि।
* संसार की समर स्थली में धीरता धारन करो।
* विमल वाणी ने वीणा ली।
*मुदित महीपति मंदिर आए।
सेवक सचिव सुमंत बुलाए।
* कायर क्रूर कपूत कुचाली यों ही मर जाते हैं।
* मधुर मधुर मुस्कान मनोहर, मधुर वेश का उजियारा।
*भग्न मग्न रत्नाकर में वह राह.
* बरसत बारिद बूंद।
* कूकै लगी कोइलैं कदम्बन पे बैठिए फिरि।
घोष अघोष, अल्पप्राण और महाप्राण, द्वित्व व्यंजन वर्ण
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