महादेवी वर्मा का जीवन परिचय, A biography of Mahadevi Varma
महादेवी वर्मा का जीवन परिचय, A biography of Mahadevi Verma
महादेवी वर्मा का जन्म, महादेवी वर्मा की शिक्षा - दीक्षा, महादेवी वर्मा की प्रमुख रचनाएं, पुरस्कार
महादेवी वर्मा की प्रमुख रचनाएं
महादेवी वर्मा की प्रमुख काव्य कृतियों में निरजा, निहार , रश्मि , सांध्य गीत, दीपशिखा एवं यामा प्रमुख है । स्मृति की रेखाएं , अतीत के चलचित्र, मेरा परिवार, पथ के साथी, श्रृंखला की कड़ियां उनकी प्रमुख गद्य कृतियां हैं। उन्होंने चांद नामक पत्रिका का संपादन भी किया है। छात्रावस्था से ही महादेवी जी कविता लिखती थीं। सुभद्रा कुमारी चौहान के साथ रहते हुए उन्होंने कई कविताएं छात्र जीवन में ही लिख दी थी। छोटी कक्षाओं में जब वे थी तभी महात्मा गांधी पर कविता लिखकर उन्हीं के कर कमलों से पुरस्कृत भी हुई थी। वह गांधीवादी आंदोलनों में भी भाग लेती रहीं। निर्धन और जरूरतमंदों की सहायता एवं ग्राम में शिक्षा की प्रेरणा उन्हें गांधीजी से ही मिली थी। कवयित्री होने के साथ ही वह कुशल चित्रकार और संगीतज्ञ भी थी।
महादेवी वर्मा की काव्य गत विशेषताएं
महादेव जी करुणा की सबसे बड़ी कवयित्री हैं। उनका संसार वेदना पूर्ण है ।यही कारण है कि उनकी दार्शनिकता में भी करुणा है। दुख और वेदना उनकी काव्य के प्राण हैं । उन्हें वेदना की प्रेरणा मीरा की करुण रचनाओं , भगवान बुद्ध के सिद्धांतों, स्वामी विवेकानंद तथा रामतीर्थ के वेदांतिक व्याख्यानों, वैदिक तथा आर्य सामाजिक सिद्धांतों और भारतीय दर्शनों के अध्ययन से मिली और इनसे बहुत कुछ लेकर अपनी रहस्यमई साधना का पाथेय बनाया। दुख ही उनके रहस्य में जीवन का श्रृंगार है।
महादेवी जी अपने को दुख की नीर भरी बदली कहती है। उनकी वेदना का एक निश्चित दर्शन है। उनकी वेदना समाज के हित चिंतन में ही है। उनका मत है -- वेदना से दृष्टिकोण में व्यापकता, भावों में कोमलता एवं द्रवता आती है । मानवता के लिए दुख की भावना आवश्यक है ।
महादेवी वर्मा की गद्य रचनाएं
गद्य साहित्य क्षेत्र में भी महादेवी जी को एक सशक्त शैलीकार माना जाता है । इनके लिखे शब्द चित्र एवं रेखाचित्र विश्व साहित्य में अनूठे है। इनके द्वारा रचित संस्मरण की परिधि में पशु पक्षियों से लेकर समाज के साधारण उपेक्षित लोग, नौकर, पथ के साथी सभी आ जाते हैं। इनकी भाषा संस्कृत निष्ठ होते हुए भी क्लिष्ट और कृत्रिम नहीं है। हिंदी साहित्य में महादेवी वर्मा सदा अमर रहेंगी ।
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