हिंदी भाषा और लिपि Hindi language, script

हिन्दी भाषा और लिपि

 हिंदी भाषा संक्षिप्त परिचय , Hindi language and script,lipi, bhasha


भाषा किसे कहते हैं, भाषा की परिभाषा, भाषा की विशेषताएं, भाषा की उत्पत्ति, भाषा के प्रकार, मानक भाषा

भाषा किसे कहते हैं ?

मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है । समाज में रहकर उसे विभिन्न प्रकार के कार्यों और उत्तरदायित्वों का निर्वहन करना पड़ता है । इस क्रम में वह अन्य लोगों के साथ विचार-विमर्श करता है तथा अपने विचारों का आदान प्रदान करता है। प्रारंभ में यह कार्य संकेतों के द्वारा ही संपन्न हो जाता होगा क्योंकि तब उनकी आवश्यकताएं सीमित थी, किंतु धीरे धीरे मानवीय आवश्यकताओं में वृद्धि हुई और एक ऐसे माध्यम की आवश्यकता महसूस होने लगी जिसके द्वारा विचारों का पूर्ण आदान-प्रदान संभव हो सके । चिंतनशील मानव मन विचार अभिव्यक्ति के लिए व्याकुल हो उठा और कालांतर में उसके मुख से वाणी रूपी सार्थक ध्वनियों की धारा प्रवाहित हो गई। इस प्रकार मनुष्य धीरे-धीरे बोलकर अथवा लिखकर अपने अपने विचारों को दूसरे लोगों तक संप्रेषित करने लगा। वास्तव में मनुष्य ही ईश्वर की वह अनुपम कृति है जिसे मां बागेश्वरी ने भावाभिव्यक्ति  के लिए वाणी की विभूति प्रदान की है। हिंदी के कुछ भाषा वैज्ञानिकों ने भाषा को निम्नलिखित शब्दों में परिभाषित किया है -

" जिन ध्वनि चिन्हों द्वारा मनुष्य परस्पर विचार विनिमय करता है, उसको समष्टि रूप में भाषा कहते हैं  "     --  बाबूराम सक्सेना।

" भाषा मनुष्यों की उस चेष्टा या व्यापार को कहते हैं जिससे मनुष्य अपने उच्चारण उपयोगी शरीर के अवयवों से उच्चारण किए गए वर्णनात्मक या व्यक्त शब्दों द्वारा अपने विचारों को प्रकट करते हैं। "  -- डॉक्टर मंगल देव शास्त्री।

"उच्चरित ध्वनि संकेतों की सहायता से भाव या विचार की पूर्ण अथवा जिसकी सहायता से मनुष्य परस्पर विचार विनिमय या सहयोग करते हैं उस यादृच्छिक रूढ ध्वनि संकेत की प्रणाली को भाषा कहते हैं " --- आचार्य देवेंद्र नाथ शर्मा।

संक्षेप में, यह कहा जा सकता है कि भाषा व साधन है जिसके द्वारा मनुष्य बोलकर अथवा लिखकर अपने भाव एवं विचारों को दूसरों तक पहुंचाता है।

भाषा की विशेषताएं

 भाषा की निम्नलिखित विशेषताएं  हैं --

भाषा विचार विनिमय का माध्यम है । 

मौखिक ध्वनियों इसका आधार है ।

भाषा में ध्वनि संकेतों का परंपरागत और रूढ़ प्रयोग होता है।

 ध्वनियों से सार्थक शब्दों का निर्माण होता है ।

प्रत्येक भाषा के अपने नियम सिद्धांत होते हैं।


भाषा की उत्पत्ति 

भाषा की उत्पत्ति के विषय में कहना अत्यंत कठिन कार्य है। परंतु इतना अवश्य कहा जा सकता है कि भाषा की उत्पत्ति की कहानी मानव सभ्यता की उत्पत्ति की कहानी और विकास के साथ जुड़ी हुई है । यह अनुमान लगाया जा सकता है कि मानव अपनी सभ्यता के विकास क्रम में यह महसूस किया होगा कि अपने भावों के अभिव्यक्ति कैसे करें। इसी क्रम में मौखिक ध्वनियां स्वत: स्फूटित हो गई होंगी और आगे चलकर वही मौखिक ध्वनियां लिखित रूप में विकसित हो गई होंगी।

भाषा के प्रकार


 भाषा दो प्रकार के होते हैं --  पहला मौखिक दूसरा लिखित। भाषा का मूल रूप मौखिक है जिसे मनुष्य सहज ही समाज से सीख लेता है। मौखिक भाषा का ज्ञान मनुष्य को माता-पिता एवं परिवार के अन्य सदस्यों से जन्म से मिलने लगता है लेकिन लिखित भाषा सीखने के लिए मनुष्य को प्रयत्न करना पड़ता है । साक्षर बनने के लिए लिखित भाषा का ज्ञान आवश्यक  है।

मानक भाषा


 आकाशवाणी, दूरदर्शन, समाचार पत्र पत्रिका,  शिक्षा आदि में प्रयुक्त भाषा मानक भाषा कहलाती है। प्रायः समाज के शिक्षित वर्ग इसका प्रयोग करते हैं, यह व्याकरण के नियमों पर आधारित भाषा होती है।

भाषा परिवार

ऐसी भाषाओं का समूह जिनका जन्म किसी एक मूल भाषा से हुआ हो भाषा परिवार कहलाता है। संसार भर में लगभग 3000 भाषाएं बोली जाती हैं जिन्हें मुख्य रूप से 12 भाषा परिवारों में बांटा गया है। वह है 1.भारोपीय ( भारत यूरोपीय )  2. द्रविड़ 3. चीनी 4.सेमेटिक 5. हेमेटिक 6. आग्नेय 7. यूराल 8.  बांटू 9. अमेरिका 10. काकेशस 11. सूडानी 12. बुशमैन

 भारतवर्ष में 2 भाषा परिवारों की भाषाएं बोली जाती हैं। भारत यूरोपीय भाषा परिवार और द्रविड़ भाषा परिवार । भारत यूरोपीय भाषा परिवार की भाषाएं जिनका प्रचलन उत्तर भारत में है, उन्हें भारतीय आर्य भाषा परिवार भी कहा जाता है। इस प्रकार अंग्रेजी, रूसी, फ्रेंच आदि यूरोपीय भाषाएं भी उसी परिवार की भाषाएं हैं जिनकी हिंदी, मराठी अथवा बंगला है।

राष्ट्रभाषा, राजभाषा एवं संपर्क भाषा 


राष्ट्रभाषा भाषा


 जो भाषा संपूर्ण देश में सामाजिक, सांस्कृतिक और भावात्मक एकता स्थापित करने में मदद करती है, राष्ट्र भाषा कहलाती है । इस दृष्टि से हिंदी ही ऐसी भाषा है जिसे लगभग संपूर्ण देश में बोली और समझी जाती है । यही कारण है कि अनेक राजनेताओं और विचारकों ने हिंदी सीखी।  स्वयं महात्मा गांधी की मातृभाषा गुजराती थी किंतु  वे भी राष्ट्रभाषा के रूप में हिंदी के प्रबल समर्थक थे।  हालांकि भारत के संविधान में राष्ट्रभाषा के रूप में हिंदी का अलग से उल्लेख नहीं है, फिर भी लोग इसे राष्ट्रभाषा के रूप में स्वीकार करते हैं।


राजभाषा

वह भाषा जिसमें सरकारी कामकाज किए जाते हैं तथा जो सरकार और जनता के बीच संपर्क का माध्यम बनती है राजभाषा कहलाती है। देश में राजभाषा की परंपरा प्राचीन काल से ही चली आ रही है। प्राचीन भारत में संस्कृत, प्राकृत, पाली, अपभ्रंश आदि भाषाएं राजभाषा के रूप में प्रयुक्त होती थी। राजपूत काल में तत्कालीन भाषा हिंदी तथा मुगल काल में फारसी भाषा राजभाषा बनी। अंग्रेजों के शासन काल में पहले तो फारसी राजकाज की भाषा बनी रही परंतु आगे चलकर यह स्थान अंग्रेजी ने ले लिया । 14 सितंबर 1949 को भारत की संविधान सभा ने हिंदी को भारत संघ की राजभाषा के रूप में मान्यता प्रदान कर दी। संविधान के अनुच्छेद 343 के अनुसार भारत संघ की राजभाषा हिंदी और लिपि देवनागरी है। उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, अंडमान निकोबार की राजभाषा हिंदी है। गुजरात और महाराष्ट्र में हिंदी को द्वितीय भाषा के रूप में मान्यता प्रदान की गई है।

संपर्क भाषा


विभिन्न भाषा भाषी जिस भाषा में परस्पर एक दूसरे से संपर्क स्थापित करते हैं उसे संपर्क भाषा के नाम से जाना जाता है । उदाहरण के लिए पंजाब और बिहार के लोग हिंदी में बातचीत करते हैं इसलिए हिंदी संपर्क भाषा हुई । इसी तरह असम के लोग और गुजरात के लोग परस्पर एक दूसरे की भाषा में विचार विनिमय  नहीं करने की स्थिति में हिंदी का सहारा लेते हैं क्योंकि दोनों थोड़ी बहुत हिंदी जानते हैं। इस प्रकार हिंदी संपर्क भाषा के रूप में विकसित हुई है।

प्रयोजन मूलक हिन्दी


विशेष प्रयोजन जैसे प्रशासन, व्यापार, बैंक, विज्ञान, कानून, जनसंचार आदि के क्षेत्र में प्रयुक्त हिंदी को प्रयोजनमूलक हिंदी कहते हैं। इन क्षेत्रों में बोलचाल एवं साहित्यिक हिंदी से कुछ भिन्न भाषा का प्रयोग होता है। प्रयोजनमूलक हिंदी के कई प्रकार है, कार्यालयी हिंदी, व्यापारिक हिंदी, विज्ञान के क्षेत्र में हिंदी, जनसंचार मीडिया की हिंदी।

लिपि

मौखिक ध्वनियों को लिखित रूप प्रदान करने के लिए जिन लेखन चिन्हों की व्यवस्था की गई है उसे लिपि कहते हैं। हिंदी की लिपि देवनागरी, उर्दू की लिपि फारसी, पंजाबी की लिपि गुरुमुखी, अंग्रेजी की लिपि रोमन है।

 लिपि का महत्व 


भाषा का लिखित रूप ज्ञान विज्ञान, साहित्य आदि को एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक पहुंचाने में मदद करता है । यह ज्ञान विज्ञान एवं सूचनाओं को दूर-दूर तक प्रसारित करने में भी मदद करता है । इसके अलावा यह भाषा को मानक रूप प्रदान करने में भी मदद करता है।

 देवनागरी लिपि


 इसे नागरी लिपि भी कहा जाता है। इसका उद्गम ब्राह्मी लिपि से माना जाता है। हिंदी के अतिरिक्त संस्कृत, मराठी, नेपाली , मैथिली , डोंगरी, कोंकणी आदि भाषाएं देवनागरी लिपि में ही लिखी जाती हैं।

 भाषा, उपभाषा और बोली में अंतर


 भाषा का क्षेत्र अधिक विशाल होता है।  यह साहित्य, शिक्षा, संचार, राजकाज आदि में व्यवहृत होता है ।उपभाषा का क्षेत्र भाषा की अपेक्षा सीमित होता है । उपभाषाएं कुछ बोलियों को अपने में समाहित किए रहती हैं जबकि बोली भाषा एवं उपभाषा का स्थानीय रूप है । इसमें साहित्य का अभाव रहता है।

 भाषा और व्याकरण 


किसी भाषा का व्याकरण उस भाषा के नियमों का संकलन होता है ।यह भाषा में एकरूपता लाकर इसे मानक रूप प्रदान करता है। समय के साथ-साथ भाषा प्रयोग के कुछ नियम स्वत: स्थिर होते रहते हैं । व्याकरण उन नियमों का संकलन और विश्लेषण करते हुए उनके अनुसार भाषा के प्रवाह का नियमन करता है।  व्याकरण  वह शास्त्र है जिसके द्वारा शुद्ध शुद्ध बोलना, लिखना, समझना और पढ़ना आता है व्याकरण के तीन प्रमुख अंग है वर्ण विचार, शब्द विचार, वाक्य विचार।



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