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वर्णों का उच्चारण स्थान, varno ka uchchatan athan, अक्षर , hindi grammar

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 वर्णों का उच्चारण स्थान, varno ka uchchatan athan, अक्षर , hindi grammar मानव मुख से ध्वनियां मुख के विभिन्न भागों से उच्चरित और अनुशासित होती हैं। विभिन्न वर्णों के उच्चारण स्थान अलग अलग होते हैं। यहां वर्णों के उच्चारण स्थान की जानकारी प्राप्त करें। कंठ -- अ आ क ख ग घ ङ ह और विसर्ग। तालु -- इ ई च छ ज झ ञ य और श। मूर्धा -- ऋ ट ठ ड ढ ण र और ष। दंत -- त थ द ध न ल और स। ओठ -- उ ऊ प फ ब भ म। कंठ - तालु -- ए ऐ। कंठ - ओष्ठ -- ओ औ। दंतोष्ठय -- व। अक्षर किसे कहते हैं ? वर्णों की वह लघुतम इकाई जिसका उच्चारण सांस के एक झटके से हो जाए उसे अक्षर कहते हैं। जैसे - आ, जी, जा, ले, मां, उठ आदि। सभी स्वर वर्णों को अक्षर कहते हैं क्योंकि उनका उच्चारण सांस के एक झटके में ही हो जाता है। लेकिन व्यंजन वर्णों के साथ जब तक कोई स्वर नहीं लगता है तब तक वह अक्षर नहीं बनता है। जैसे - खा, क्या। हिन्दी में एकाक्षरी से लेकर अनेकाक्षरी तक शब्द रचना संभव है, ‌जैसे -- एकाक्षरी -- खा, आ, ओ, जा, गा, हां। दो अक्षरी शब्द -- आओ, कवि, खाया, शाखा, पूजा। तीन अक्षरी शब्द -- आइए, जाइए, कविता, बेचारा, पाइए। चार अक्षरी शब्द -...

महादेवी वर्मा का जीवन परिचय, A biography of Mahadevi Varma

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  महादेवी वर्मा का जीवन परिचय, A biography of Mahadevi Verma महादेवी वर्मा का जन्म, महादेवी वर्मा की शिक्षा - दीक्षा, महादेवी वर्मा की प्रमुख रचनाएं, पुरस्कार पक्ष / विषय विवरण जन्म 26 मार्च 1907 जन्म स्थान फर्रुखाबाद, उत्तर प्रदेश उपनाम / उपाधि आधुनिक मीरा पिता का नाम श्री गोविंद प्रसाद वर्मा माता का नाम हेमरानी देवी शिक्षा एम.ए. (संस्कृत), इलाहाबाद विश्वविद्यालय साहित्यिक युग छायावाद प्रमुख काव्य संग्रह नीहार, रश्मि, नीरजा, सांध्यगीत, दीपशिखा, यामा (सभी काव्य संग्रहों का संकलन) रेखाचित्र और संस्मरण अतीत के चलचित्र, स्मृति की रेखाएं, मेरा परिवार, पथ के साथी प्रमुख निबंध संग्रह श्रृंखला की कड़ियाँ, क्षणदा, साहित्यकार की आस्था प्रमुख सम्मान / पुरस्कार ज्ञानपीठ पुरस्कार (1982 - 'यामा' के लिए), पद्म भूषण (1956), पद्म विभूषण (1988 - मरणोपरांत), साहित्य अकादमी फेलोशिप (1979) संपादन कार्य 'चाँद' पत्रिका का संपादन निधन 11 सितंबर 1987 (इलाहाबाद / प्रयागराज) आधुनिक मी...

सैयद अमीर अली 'मीर' हिन्दी कवि की जीवनी, A biography of Saiyad Amir Ali Meer, Hindi poet.

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 सैयद अमीर अली 'मीर' हिन्दी कवि की जीवनी, A biography of Saiyad Amir Ali Meer, Hindi poet.  हिन्दी साहित्य  के द्विवेदी युग के कवि सैयद अमीर अली मीर       ( 1873 - 1937 ) का जन्म सागर मध्यप्रदेश में हुआ था। बचपन में ही पिता की मृत्यु हो जाने के कारण यह अपने चाचा के पास सागर जिले के देवरी नामक गांव में रहने लगे। साहित्य के क्षेत्र में इनका प्रवेश समस्या पूर्ति के कारण हुआ। इनके कारण देवरी में अमीर मंडल कवि समाज की स्थापना हुई। सैयद अमीर अली मीर हिंदी के बहुत प्रेमी थे और हिंदी को राष्ट्रभाषा बनाने के समर्थक थे ।रामचरितमानस के प्रति इनका विशेष अनुराग था। "उलाहना पंचक" और "अन्योक्ति शतक " इनकी मुख्य काव्य कृतियां हैं। सैयद अमीर अली मीर की कविताओं के मुख्य विषय ईश्वर भक्ति और देश प्रेम है ।इनकी भाषा परिमार्जित खड़ी बोली है ।द्विवेदी युग के यह प्रमुख कवि माने जाते हैं।

बाबू वीर कुंवर सिंह जीवन परिचय, A biography of Babu Veer Kunwar Singh

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 बाबू वीर कुंवर सिंह जीवन परिचय, A biography of Babu Veer Kunwar Singh सन 1857 ई के स्वतंत्रता संग्राम के महानायक बाबू वीर कुंवर सिंह बिहार के शाहाबाद जिले के जगदीशपुर में सन् 1782 ई में हुआ था। इनके पिता का नाम साहब जादा सिंह और माता का नाम पंचरत्न कुंवर था । बाबू साहब जादा सिंह जगदीशपुर रियासत के जमींदार थे। बाबू कुंवर सिंह ने हिंदी , संस्कृत , फारसी आदि की शिक्षा घर पर ही प्राप्त की थी लेकिन इनका मन पढ़ाई से अधिक घुड़सवारी, तलवारबाजी, कुश्ती आदि साहसिक कार्यों में लगता था। सन् 1827 में पिता की मृत्यु के बाद बाबू कुंवर सिंह ने रियासत की जिम्मेदारी संभाली । उन दिनों ब्रिटिश हुकूमत का अत्याचार चरम पर था। कृषि, उद्योग , व्यापार आदि का बहुत बुरा हाल था । लोग त्राहि-त्राहि कर रहे थे। राज रजवाड़ों का भी बुरा हाल था। इससे ब्रिटिश सत्ता के खिलाफ देशभर में असंतोष फैल गया था। ऐसी स्थिति में बाबू वीर कुंवर सिंह ने ब्रिटिश हुकूमत से लोहा लेने का संकल्प लिया। उन दिनों जगदीशपुर के जंगलों में बसूरिया बाबा नामक एक प्रसिद्ध संत रहते थे । कहते हैं, उन्होंने ही बाबू वीर कुंवर सिंह को देश भक्ति और स...

डॉ. राजेन्द्र प्रसाद, भारत के प्रथम राष्ट्रपति, जीवन परिचय, Dr.Rajendra Prasad, first president of India , biography

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 डॉ. राजेन्द्र प्रसाद, भारत के प्रथम राष्ट्रपति, जीवन परिचय, Dr.Rajendra Prasad, first president of India , biography परीक्षार्थी परीक्षक से भी अधिक योग्य है, यह कथन यदि किसी भारतीय नेता के प्रशस्ति में कहे गए हैं तो वे हैं डॉ राजेंद्र प्रसाद। इनका जन्म 03 दिसंबर 1884 ई को बिहार राज्य के छपरा जिलांतर्गत जीरादेई नामक स्थान में हुआ था। इनकी प्रारम्भिक शिक्षा उर्दू - फारसी के माध्यम से हुई थी। 1902 ई में इन्होंने इंट्रेंस की परीक्षा में कलकत्ता विश्वविद्यालय में सर्वप्रथम स्थान प्राप्त किया था। फिर इन्होंने एफ . ए, बी. ए , एम . ए., एम. एल की उपाधियां प्राप्त की। डॉ. राजेन्द्र प्रसाद के मन में राजनीति के बीज विद्यार्थी जीवन से ही अंकुरित हो रहे थे। छात्र जीवन में ही इन्होंने कलकत्ता में छात्रों को संगठित करना प्रारंभ कर दिया था। कांग्रेस के लखनऊ अधिवेशन में महात्मा गांधी की नजर इन पर पड़। महात्मा गांधी के अचार विचार से ये काफी प्रभावित हुए। महात्मा गांधी के नेतृत्व में जब चंपारण आंदोलन प्रारंभ हुआ , तो राजेंद्र प्रसाद जी खूब बढ़ चढ़कर हिस्सा लिए। पटना के सदाकत आश्रम की स्थापना में इनका...

सुभाष चंद्र बोस जीवनी, Subhash Chandra Bose biography, Azad Hind fauj

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  सुभाषचन्द्र बोस का जीवन परिचय a biography of Netaji Subhash Chandra Bose in hindi वीर प्रसूता जननी मां भारती के महान सपूत नेताजी सुभाष चन्द्र बोस का जन्म उड़ीसा के कटक नामक शहर में 23 जनवरी 1887 को हुआ था। इनके पिताजी श्री राजबहादुर जानकीनाथ बोस नगर के गणमान्य वकील तथा कटक नगर निगम और जिला बोर्ड के प्रधान थे। pradushan essay       (क्लिक करें और पढ़ें) सुभाषचन्द्र बोस की शिक्षा  चंद्र बोस की प्रारंभिक शिक्षा कटक में हुई थी। उन्होंने 1913 ई में मैट्रीक की परीक्षा उत्तीर्ण की। वे बचपन से ही पढ़ने में बड़े मेघावी थे।  मैट्रिक की परीक्षा के बाद उच्च शिक्षा के लिए वे कोलकाता के सुप्रसिद्ध  प्रेसिडेंसी कॉलेज में आ गये। 1919 ई में वे भारतीय सिविल सेवा परीक्षा देने लंदन गए। अपने कठोर परिश्रम और मेघाविता का परिचय देते हुए उन्होंने आई सी एस की परीक्षा उत्तीर्ण की। उनकी चतुराई और मेघाविता के बहुत किस्से मशहूर है।  कहते हैं, साक्षात्कार के समय एक अंग्रेज अफसर ने उन्हें एक अंगूठी दिखाते हुए कहा -- ' क्या सुभाषचन्द्र बोस इस अंगूठी से होकर निकल सकता है।‘ उनका ...

सुमित्रानंदन पंत , Sumitranandan pant biography, chayawadi Kavi

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    सुमित्रानंदन पंत जी का जीवन परिचय सुमित्रा नंदन पंत का जन्म सन् 1900 में अल्मोड़ा (उत्तरांचल) जिले के कौसानी नामक स्थान में हुआ था।  इनका मूल नाम गोसाईं दत्त था।  पंत जी हिंदी साहित्य की प्रमुख प्रवृत्ति छायावाद के महत्त्वपूर्ण स्तम्भ माने जाते हैं।  पंत जी का जन्म स्थान प्राकृतिक वैभव से परिपूर्ण है, इसलिए उनकी कविताओं पर प्रकृति के अनुराग का स्पष्ट प्रभाव दिखाई देता है।  पंत जी में वास्तविकता के प्रतिकूल और दारुण रूप के अभाव का कारण भी कुछ सीमा तक प्रकृति के प्रभाव को माना जाता है।  उनके मन में प्रकृति के प्रति इतना मोह पैदा हो गया था कि ये जीवन की नैसर्गिक व्यापकता और अनेकरूपता में पूर्ण रूप से आसक्त न हो सके ---  छोड़ द्रुमों की मृदु छाया तोड़ प्रकृति से भी माया, बाले ते बाल जाल में कैसे उलझा दूं लोचन?  छोड़ अभी से इस जग को।  सुमित्रा नंदन पंत को प्रकृति का सुकुमार कवि कहा जाता है।  हिंदी कविता में प्रकृति को पहली बार प्रमुख विषय बनाने का काम पंत जी ने ही किया है।    सुमित्रा नंदन    पंत जी के जन्म क...

शहीद रामप्रसाद बिस्मिल , Shahid Ramprasad Bismil , biography

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 अमर शहीद रामप्रसाद बिस्मिल , Amar Shaheed Ramprasad Bismil, biography 19 दिसंबर, 1927 प्रातः साढ़े छः बजे का समय । गोरखपुर जेल से फांसी के तख्ते की ओर जाते हुए एक क्रांतिकारी हुंकार भरते हुए कह उठा -- " मालिक तेरी रज़ा रहे और तू ही तू रहे,  बाकी न मैं रहूं न मेरी आरज़ू रहे।  जब तक कि तन में जान, रगों में लहू रहे,  तेरा ही जिक्र या तेरी ही जुस्तजू रहे।।" फिर उसने अपनी इच्छा व्यक्त करते हुए कहा -- " मैं ब्रिटिश सरकार का विनाश चाहता हूं। " ये शब्द अमर शहीद रामप्रसाद बिस्मिल के हैं जब वे फांसी के फंदे पर झूलने जा रहे थे। राम प्रसाद बिस्मिल का जन्म 1897 ई में हुआ था। ऊर्दू की चौथी कक्षा पास करने के बाद जब वे पांचवीं कक्षा में पहुंच तब उनकी आयु 14 वर्ष की थी। बचपन में उन्हें कुछ बुरी आदतों ने घेर लिया था लेकिन उसी समय मुंशी इंद्रजीत से उनका मेल जोल हुआ और उन्होंने संध्या सीखी। बिस्मिल लिखते हैं -- "सत्यार्थ प्रकाश " के अध्ययन से मेरा काया पलट हो गया। उन्हीं दिनों शाहजहांपुर में स्वामी सोमदेव जी का आगमन हुआ। उनके भाषणों का मुझ पर अच्छा प्रभाव पड़। मैं धर्म - कर्...

अकबर के नौ रत्नों का परिचय, Akbar ke nine Ratna

  अकबर के नौ रत्नों का संक्षिप्त परिचय अकबर मुगल वंश का तीसरा और प्रसिद्ध शासक था। उसने अपने दरबार में विभिन्न क्षेत्रों में पारंगत नौ लोगों की एक ऐसी टीम बनाई थी जिसे नौ रत्न कहा जाता है। आइए, अकबर के दरबार के नौ रत्नों के विषय में जानकारी प्राप्त करें। 1. बीरबल -- अकबर के नवरत्नों में बीरबल सबसे प्रसिद्ध थे। इनका जन्म काल्पी में 1528 ई में हुआ था। बीरबल ब्राह्मण थे। इनके बचपन का नाम महेश दास था। बीरबल एक कुशल वक्ता, कहानीकार, और कवि थे। बीरबल अकबर के बहुत नजदीक थे। इनकी योग्यता से प्रभावित होकर अकबर ने इन्हें कविराज, राजा की उपाधि प्रदान की थी। संसार में अकबर - बीरबल के किस्से मशहूर हैं। अकबर ने इन्हें न्याय विभाग का सर्वोच्च अधिकारी भी बनाया था। 1586 ई में यूसुफजाइयों के विद्रोह को दबाने के लिए गए बीरबल की हत्या कर दी गई। 2. अबुल फजल --  अबुल फजल का जन्म 1550 ई में हुआ था। इनके पिता सूफी शेख मुबारक थे। वह अकबर का मुख्य सलाहकार और सचिव था। उस इतिहास, दर्शन और साहित्य की भरपूर जानकारी प्राप्त थी। अकबर द्वारा चलाए दीन - एक - इलाही धर्म का मुख्य पुरोहित था। उसने आईने अकबरी और अ...

Krishn bhakt kavi aur Raskhan कृष्ण भक्त कवि और रसखान

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कृष्ण भक्त कवि और रसखान,     Krishan bhakt kavi aur Raskhan कृष्ण भक्त कवि और रसखान रसखान का जीवन परिचय कवि रसखान का असली नाम रसखान की रचनाएं रसखान की भाषा शैली रसखान द्वारा रचित पद हिन्दी साहित्य के भक्ति काल के प्रसिद्ध कवियों में कृष्ण भक्त कवि रसखान का नाम बहुत आदर के साथ लिया जाता है। मुसलमान कवियों ने भी हिन्दू देवी देवताओं का भजन कीर्तन करते हुए इनकी अनन्य श्रद्धा से भक्ति की है। रसखान का नाम ऐसे कवियों में अगली पंक्ति में लिया जाता है। कृष्ण भक्त होने के कारण इन्हें ब्रजभूमि से बहुत प्रेम था। यहां कृष्ण भक्त कवियों में रसखान का स्थान, रसखान का जीवन परिचय और ब्रजभूमि से उनके प्रेम के बारे में जानकारी प्राप्त करें। रसखान का असली नाम, रसखान की जन्म तिथि कृष्ण भक्त कवि रसखान का असली नाम सैयद इब्राहिम था। इनका जन्म 1548 ई में हुआ था। श्रीकृष्ण की लीलाओं और राधा - कृष्ण की प्रेम कहानी सुनकर ये इतने प्रभावित हुए कि ये श्रीकृष्ण के भक्त बन गये। इन्होंने अपना नाम रसखान रख लिया। रसखान जी स्वामी विट्ठल नाथ के शिष्य बन गये। उन्होंने स्वामी विट्ठल नाथ से दीक्षा लेकर ब्रज भूमि ...

Saiyad Haidar raja biography सैयद हैदर रजा की जीवनी

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Saiyad Haidar raja biography,                 सैयद हैदर रजा की जीवनी सैयद हैदर रजा एक चित्रकार, सैयद हैदर रजा का जन्म, शिक्षा, सैयद हैदर रजा की चित्रकला में भारतीय और पश्चिमी कला का मेल। सैयद हैदर रजा की कला में रंगों की व्यापकता और अध्यात्म की गहराई। 11th NCERT Hindi. आधुनिक भारतीय चित्रकला को जिन कलाकारों ने नया और आधुनिक स्थान दिया है उनमें सैयद हैदर रजा का नाम प्रमुखता से लिया जाता है। इतना ही नहीं , सैयद हैदर रजा केवल इसी उपलब्धि के लिए सम्मानित नहीं होते, उनके सम्मान का एक और बड़ा कारण है कि उन्होंने आधुनिक भारतीय कला को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित करने का महत्वपूर्ण कार्य किया है। इस तरह उनका नाम हुसैन और सूजा के साथ अगली पंक्ति में लिया जाता है। सोलह करोड़ में बिकी थी इनकी पेंटिंग। तो आइए, हम सैयद हैदर रजा के व्यक्तित्व और कृतित्व पर प्रकाश डालते हैं। सैयद हैदर रजा का जन्म सन् 1922 ई में मध्यप्रदेश (भारत ) के बाबरिया नामक गांव में हुआ था। सैयद हैदर रजा ने चित्रकला की शिक्षा नागपुर स्कूल आफ आर्ट, व सर जे. जे. स्कूल आफ आर्ट , मुम्ब...

Shershah Suri , शेरशाह सूरी, जीवनी, संघर्ष,शासन व्यवस्था

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 शेरशाह सूरी (1540 - 1545 ) जीवनी, शासन व्यवस्था, युद्ध, जीवन संघर्ष,  शेरशाह का जन्म, शेरशाह के बचपन का नाम, शेरशाह के माता-पिता, फरीद खां का नाम शेर खां क्यों पड़ा। शेरशाह का विवाह, शेरशाह का शासन काल, शेरशाह की मृत्यु, शेरशाह सूरी द्वारा किए गए कार्य। ग्रैंड टैंक रोड । पक्ष / विषय विवरण जन्म 1486 (कुछ इतिहासकारों के अनुसार 1472) जन्म स्थान सासाराम (बिहार) या बजवाड़ा (होशियारपुर, पंजाब) मूल नाम (बचपन का नाम) फरीद खान पिता का नाम हसन खान (जौनपुर के जगीरदार) 'शेर खान' की उपाधि बिहार के बहार खान लोहानी द्वारा एक ही वार में शेर को मारने पर दी गई साम्राज्य सूरी साम्राज्य (द्वितीय अफ़गान साम्राज्य) शासन काल 1540 - 1545 (5 वर्ष) प्रमुख युद्ध चौसा का युद्ध (1539 - हुमायूँ को हराया), कन्नौज/बिलग्राम का युद्ध (1540 - हुमायूँ को भारत छोड़ने पर मजबूर किया), गिरी-सुमेल का युद्ध (1544 - मालदेव राठौड़ के खिलाफ) प्रशासनिक व आर्थिक सुधार रुपया (178 ग्रेन का चाँदी का सिक्का) की शुरुआत, दाम (तांबे का सिक्का), डाक व्य...

Mahatma Gandhi, महात्मा गांधी

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 महात्मा गांधी, Mahatma Gandhi महात्मा गांधी प्राणी मात्र के हितचिंतक थे। उनके लिए अपना - पराया , देशी - विदेशी सभी बराबर थे। यही कारण है कि उन्हें महामानव की संज्ञा दी जाती है और सत्य , अहिंसा तथा शांति का अग्रदूत माना जाता है। भारतवासी उन्हें बापू और राष्ट्र पिता कहते हैं। महात्मा गांधी का जन्म एवं शिक्षा महात्मा गांधी का पूरा नाम मोहन दास करमचंद गांधी है। महात्मा गांधी का जन्म 02 अक्टूबर, 1869 में गुजरात के पोरबंदर नामक स्थान में हुआ था। इनके पिताजी का नाम करमचंद गांधी और माता का नाम पुतलीबाई था। महात्मा गांधी को राष्ट्रपिता और बापू कहकर भी संबोधित किया जाता है। महात्मा गांधी की प्रारम्भिक शिक्षा पोरबंदर के पाठशाला में आरंभ हुई। इनकी पत्नी का नाम कस्तूरबा गांधी है। 1887 ई में इन्होंने इंट्रेंस की परीक्षा पास की। उच्च शिक्षा के लिए इनका नामांकन श्याम लाल कालेज , भावनगर में कराया गया। परन्तु, वहां इनका मन नहीं लगा। मोहन दास करमचंद गांधी के भाई लक्ष्मी दास जी इन्हें बैरिस्टर की पढ़ाई के लिए विदेश भेजना चाहते थे। किंतु इनकी माता जी इसके लिए तैयार नहीं थीं। उन्हें लगता था कि मेरा मोह...

Rajiya Sajjad jahir, रज़िया सज्जाद ज़हीर

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 रज़िया सज्जाद ज़हीर का जीवन परिचय,A biography of Rajiya Sajjad jahir रज़िया सज्जाद ज़हीर मूलतः ऊर्दू कहानी लेखिका हैं। उनका जन्म  15 फरवरी, 1917 को अजमेर, राजस्थान में हुआ था। और उनका निधन 18 दिसम्बर , 1979 को हुआ। रज़िया सज्जाद ज़हीर की प्रमुख रचनाएं हैं - जर्द़ गुलाब।( ऊर्दू कहानी संग्रह ) सम्मान -- सोवियत भूमि नेहरू पुरस्कार, ऊर्दू अकादमी, उत्तर प्रदेश, अखिल भारतीय लेखिका संघ अवार्ड। रज़िया सज्जाद ज़हीर लिखती हैं - हमारे दृढ़ संकल्प ही हमारी ताकत है, हमारा लिखना ही हमें जिन्दा रखता है। रज़िया सज्जाद ज़हीर घर पर ही रहकर बी. ए. तक की शिक्षा प्राप्त की थी। विवाह के बाद उन्होंने इलाहाबाद से ऊर्दू में एम. ए. किया। 1947 में वह अजमेर से लखनऊ आ गई। उन्होंने करामात हुसैन गर्लस कालेज में अध्यापन करने लगीं। सन् 1965 में उनकी नियुक्ति सोवियत सूचना विभाग में हुई। मधुमेह( diabetics ) की नई तकनीक दवा  आधुनिक ऊर्दू कथा साहित्य में उनका महत्वपूर्ण योगदान है। उन्होंने कहानी और उपन्यास दोनों लिखे हैं। ऊर्दू में बाल साहित्य पर भी उन्होंने लेखनी चलाई है। मौलिक लेखन के साथ-साथ उन्होंने अन्...