Saiyad Haidar raja biography सैयद हैदर रजा की जीवनी
Saiyad Haidar raja biography,
सैयद हैदर रजा की जीवनी
सैयद हैदर रजा एक चित्रकार, सैयद हैदर रजा का जन्म, शिक्षा, सैयद हैदर रजा की चित्रकला में भारतीय और पश्चिमी कला का मेल। सैयद हैदर रजा की कला में रंगों की व्यापकता और अध्यात्म की गहराई। 11th NCERT Hindi.
आधुनिक भारतीय चित्रकला को जिन कलाकारों ने नया और आधुनिक स्थान दिया है उनमें सैयद हैदर रजा का नाम प्रमुखता से लिया जाता है। इतना ही नहीं , सैयद हैदर रजा केवल इसी उपलब्धि के लिए सम्मानित नहीं होते, उनके सम्मान का एक और बड़ा कारण है कि उन्होंने आधुनिक भारतीय कला को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित करने का महत्वपूर्ण कार्य किया है। इस तरह उनका नाम हुसैन और सूजा के साथ अगली पंक्ति में लिया जाता है। सोलह करोड़ में बिकी थी इनकी पेंटिंग। तो आइए, हम सैयद हैदर रजा के व्यक्तित्व और कृतित्व पर प्रकाश डालते हैं।
सैयद हैदर रजा का जन्म सन् 1922 ई में मध्यप्रदेश (भारत ) के बाबरिया नामक गांव में हुआ था। सैयद हैदर रजा ने चित्रकला की शिक्षा नागपुर स्कूल आफ आर्ट, व सर जे. जे. स्कूल आफ आर्ट , मुम्बई से प्राप्त की। भारत में अनेक प्रदर्शनियां आयोजित करने के बाद सन 1950 में वे फ्रांसिसी सरकार की छात्रवृत्ति पर अध्ययन करने फ्रांस चले गए। और वहां अध्ययन किया।
सैयद हैदर रजा का आरम्भिक जीवन संघर्षों से भरा था। फिर भी उन्होंने अपनी कला - संघर्ष और सर्जनात्मक बेचैनी और रचना के प्रति जुनून के बल पर अपना मुकाम हासिल किया।
आधुनिक भारतीय कला को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित करने वालों में हुसैन, सूजा और रजा का नाम बड़े आदर के साथ लिया जाता है। इन तीनों में हुसैन ज्यादा घुमक्कड़ थे, लेकिन उनका केन्द्र भारत ही था। सूजा न्यूयॉर्क चले गए और सैयद हैदर रजा पेरिस में जाकर बस गए।
सैयद हैदर रजा की कला में भारतीय और पश्चिमी कला दृष्टिकोण का मेल है। इसका सबसे बड़ा कारण है कि रजा का जन्म भारत में हुआ। उन्होंने भारत में ही चित्रकला की शिक्षा प्राप्त की थी और भारतीय कला संस्कृति को गहराई से अध्ययन किया था। इसके बाद जब वे फ्रांस में बस गए तो वहां की कला संस्कृति को भी बखूबी देखा।
सैयद हैदर रजा लम्बे समय तक पश्चिम में रहे और वहां की कला की बारिकियों को देखा परखा। उससे प्रभावित भी हुए लेकिन इसके बावजूद वे भारतीय कलाकार बने रहे।
बिंदु सैयद हैदर रजा की कला - रचना के केंद्र में है। उनकी कई कलाकृतियों में बिंदु का रूपाकार है। यह बिंदु केवल रूपाकार ही नहीं है , बल्कि पारंपरिक भारतीय चिंतन का केंद्र बिन्दु भी है। वास्तव में बिंदु की तरफ उनका झुकाव उनके स्कूल के शिक्षक नंदलाल झरिया की देन है।
सैयद हैदर रजा की व्यक्तित्व और कृतित्व में उदात्तता है। उनकी कला में रंगों की व्यापकता और अध्यात्म की गहराई है। सैयद हैदर रजा की कला को भारत के साथ साथ विदेशों में भी सम्मानित किया गया है। सैयद हैदर रजा को ग्रेड आव आफिसर आव द आर्डर आव आर्ट्स एंड लेटर्स सम्मान से नवाजा गया है। रुडाल्फ वान,लेडेन, पियरे गोदिवेयर , गीति सेन , जाक लांसे , मिशेल एंबेयर आदि ने सैयद हैदर रजा पर मोनोग्राफ लिखे हैं।
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