Ravindra Nath Tagore biography, रवीन्द्र नाथ टैगोर, जीवनी

Ravindra nath tagore

 रवीन्द्र नाथ टैगोर, जीवनी Ravindra Nath Tagore

रवीन्द्र नाथ टैगोर का जन्म, जन्म तिथि, जन्म स्थान,
रवीन्द्र नाथ टैगोर के माता-पिता,
गुरूदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर, गुरूदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर और महात्मा गांधी,
शांति निकेतन, गुरूदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर को सर की उपाधि, रवीन्द्रनाथ टैगोर ने सर की उपाधि क्यों लौटा दी, गुरूदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर को नोबल पुरस्कार, रवीन्द्रनाथ टैगोर की रचनाएं, रवीन्द्रनाथ टैगोर द्वारा चित्रकारी, रवीन्द्रनाथ टैगोर की विचारधारा,



विश्व में कुछ ऐसी प्रतिभाओं का आविर्भाव होता है जिन्हें देश काल की सीमाएं बांध नहीं पातीं। रवीन्द्र नाथ टैगोर ऐसी ही प्रतिभा का नाम है जो न केवल भारत के बल्कि संपूर्ण विश्व के कवि हैं। वास्तविकता तो यह है कि वे केवल कवि ही नहीं , कथाकार, उपन्यासकार, नाटककार, निबंधकार और चित्रकार भी थे। आइए, इस लेख में उनकी संपूर्ण जीवन चरित्र, व्यक्तित्व और कृतित्व का अध्ययन करते हैं।

रवीन्द्र नाथ टैगोर का जन्म, जन्म तिथि, जन्म स्थान


रवीन्द्र नाथ टैगोर का जन्म 07 मई, 1861 ई को  कोलकाता महानगर के सुप्रसिद्ध ठाकुर परिवार में हुआ था। इनके पिता महर्षि देवेन्द्र नाथ ठाकुर थे। सुविख्यात ब्रह्म समाज की स्थापना में इनका महत्वपूर्ण योगदान था। बचपन में ही इनकी मां स्वर्गवास कर गयी थी। इसलिए मां की ममता से ये वंचित रह गए थे। कदाचित मां की ममता का अभाव और घर का कठोर अनुशासन व्यवस्था ने इन्हें विश्व सुन्दरी प्रकृति की ओर उन्मुख कर दिया। हरे - भरे पौधे पर झुमते लहराते रंग - विरंगे फूल , सुदूर अमराइयो की नव विकसित पल्लवों के बीच लुकाछिपी करते पंछी दल, अनंत नील गगन में उमड़ते घुमरते बादलों की अठखेलियां, रवि बाबू के मन को ऐसा प्रभावित किया कि वे प्रकृति की चिर सहचरी बनकर रह गए।

रवीन्द्र नाथ टैगोर की शिक्षा और प्रारम्भिक जीवन


बचपन में रवींद्र नाथ टैगोर की पढ़ाई घर के कठोर वातावरण में प्रारंभ हुई। फिर इन्होंने कोलकाता के सुप्रसिद्ध ओरियंटल सेमिनरी, नार्मल स्कूल, बंगाल अकादमी तथा सेंट जेवियर्स कॉलेज में शिक्षा प्राप्त की। घर पर भी पिता जी ने सुयोग्य शिक्षकों की व्यवस्था कर रखी थी। 1878 ई में रवींद्र नाथ टैगोर उच्च शिक्षा के लिए इंग्लैंड रवाना हुए और वहां इन्होंने ब्राइटन पब्लिक स्कूल के साथ-साथ लंदन विश्वविद्यालय में भी शिक्षा ग्रहण की।

रवीन्द्र नाथ टैगोर की अवस्था जब मात्र तेरह वर्ष की थी, तभी से इनकी प्रवृत्ति कविता लेखन की ओर हो गई थी। इनकी पहली कविता ' अभिलाष '  ' तत्व बोधिनी ' पत्रिका में प्रकाशित हुई थी। इनके काव्य की मूल धारा की शुरुआत ' सांध्य गीत '  ( 1882 ) से होती है। उन्होंने यह अवश्य कहा कि वे जन्म रोमांटिक हैं, किन्तु यह भी कहा कि वे पृथ्वी को छोड़कर कहीं नहीं जाना चाहते।

रवीन्द्र नाथ टैगोर की प्रमुख रचनाएं


गीतांजलि, माली, बलाका जैसी सशक्त कृतियों के अतिरिक्त इनकी अन्य कृतियां हैं -- आंख की किरकिरी, नौका डुबी, राजर्षि, गोरा, घर और बाहर, तीन पुरुष, बाल्मीकि प्रतिभा, प्रकृति की प्रतिशोध, माया का खेल ( गीति नाट्य ), चित्रांगदा, विसर्जन, मालिनी, फाल्गुनी, रक्तधारा, डाकघर (नाटक ), घर वापसी, पोस्ट मास्टर, काबुली वाला, प्राचीन साहित्य, शिक्षा, मानव धर्म ( निबंध) आदि।
 

रवीन्द्र नाथ टैगोर को सर की उपाधि

अपना देश भारत उस समय अंग्रेजों का गुलाम था। अंग्रेजी सरकार ने इन्हें नाईट ( सर ) की उपाधि प्रदान की, परन्तु जालियांवाला बाग के निर्मम हत्या काण्ड से दुखी होकर इन्होंने यह उपाधि अंग्रेजी सरकार को लौटा दिया।

शिक्षा के क्षेत्र में रवींद्र नाथ टैगोर का योगदान

शिक्षा के क्षेत्र में इन्हें  सुप्रसिद्ध शांति निकेतन के नाम से जाना जाता है। प्राचीन भारतीय शिक्षा पद्धति के आधार पर यहां विश्व - भारती विश्वविद्यालय की स्थापना हुई। इसकी स्थापना द्वारा वे समस्त विश्व को एक नीड़ के समान बसाना चाहते थे।

रवीन्द्र नाथ टैगोर और महात्मा गांधी


राष्ट्र पिता महात्मा गांधी रवीन्द्र नाथ टैगोर से काफी प्रभावित हुए। देश की गुरु गंभीर समस्याओं पर  विचार-विमर्श के लिए वे अक्सर उनके पास आया करते थे। महात्मा गांधी इन्हें गुरूदेव कहा करते थे। गुरूदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर द्वारा रचित गीत ' जन गण मन अधिनायक जय हे, भारत भाग्य विधाता ' स्वतंत्र भारत का राष्ट्र गान के उच्च स्थान पर प्रतिष्ठित है। इतना ही नहीं गुरूदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर की कवित्व शक्ति की गूंज सात समंदर पार विदेशों तक गई। इनकी सवोत्तम कृति  ' गीतांजलि ' नोबेल पुरस्कार से विभूषित हुई।

रवीन्द्र नाथ टैगोर की चित्रकारी


जीवन के सांध्य काल में गुरूदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर ने चित्र बनाना भी शुरू किया था। इन चित्रों में युग का संशय, मोह, क्लांति, निराशा स्पष्ट दिखाई देता है। परन्तु यह भाव क्षणिक ही था। नये युग के नये जीवन बोध को उन्होंने सहर्ष स्वीकार किया था। 07 अगस्त 1941 को वे हमें छोड़कर सदा के लिए स्वर्ग चले गए, परन्तु उनका साहित्य हमें सदा उर्जा प्रदान करता रहेगा।

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

प्रेमचंद के जीवन पर आधारित वस्तुनिष्ठ प्रश्न उत्तर premchand MCQ answer

बाबू वीर कुंवर सिंह जीवन परिचय, A biography of Babu Veer Kunwar Singh

सैयद अमीर अली 'मीर' हिन्दी कवि की जीवनी, A biography of Saiyad Amir Ali Meer, Hindi poet.