संदेश

जनवरी, 2022 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

बाबू वीर कुंवर सिंह जीवन परिचय, A biography of Babu Veer Kunwar Singh

चित्र
 बाबू वीर कुंवर सिंह जीवन परिचय, A biography of Babu Veer Kunwar Singh सन 1857 ई के स्वतंत्रता संग्राम के महानायक बाबू वीर कुंवर सिंह बिहार के शाहाबाद जिले के जगदीशपुर में सन् 1782 ई में हुआ था। इनके पिता का नाम साहब जादा सिंह और माता का नाम पंचरत्न कुंवर था । बाबू साहब जादा सिंह जगदीशपुर रियासत के जमींदार थे। बाबू कुंवर सिंह ने हिंदी , संस्कृत , फारसी आदि की शिक्षा घर पर ही प्राप्त की थी लेकिन इनका मन पढ़ाई से अधिक घुड़सवारी, तलवारबाजी, कुश्ती आदि साहसिक कार्यों में लगता था। सन् 1827 में पिता की मृत्यु के बाद बाबू कुंवर सिंह ने रियासत की जिम्मेदारी संभाली । उन दिनों ब्रिटिश हुकूमत का अत्याचार चरम पर था। कृषि, उद्योग , व्यापार आदि का बहुत बुरा हाल था । लोग त्राहि-त्राहि कर रहे थे। राज रजवाड़ों का भी बुरा हाल था। इससे ब्रिटिश सत्ता के खिलाफ देशभर में असंतोष फैल गया था। ऐसी स्थिति में बाबू वीर कुंवर सिंह ने ब्रिटिश हुकूमत से लोहा लेने का संकल्प लिया। उन दिनों जगदीशपुर के जंगलों में बसूरिया बाबा नामक एक प्रसिद्ध संत रहते थे । कहते हैं, उन्होंने ही बाबू वीर कुंवर सिंह को देश भक्ति और स...

तानसेन और राग दीपक की कहानी, अकबर दरबार के नवरत्नों में एक महत्वपूर्ण रत्न तानसेन, तानसेन के गुरु स्वामी हरिदास जी, तानसेन की मौत कैसे हुई, राग दीपक की ज्वाला से तानसेन को किसने बचाया। Tansen aur rag Deepak,

चित्र
  तानसेन और राग दीपक की कहानी, अकबर दरबार के नवरत्नों में एक महत्वपूर्ण रत्न तानसेन, तानसेन के गुरु स्वामी हरिदास जी, तानसेन की मौत कैसे हुई, राग दीपक की ज्वाला से तानसेन को किसने बचाया।  Tansen aur rag Deepak,  तानसेन का नाम कौन नहीं जानता ? तानसेन अकबर के दरबार के  नवरत्नों में एक महान रत्न थे। तानसेन स्वामी हरिदास के शिष्य थे। कहते हैं , तानसेन पांच साल की अवस्था तक गूंगे थे, स्वामी हरिदास जी ने उन्हें गीत संगीत की शिक्षा दी। संगीत की दुनिया में तानसेन ने इतना नाम कमाया कि महान मुगल बादशाह अकबर ने उन्हें अपने दरबार में महत्वपूर्ण रत्न बना दिया। बादशाह अकबर उन्हें बहुत मानते थे। इस बात से अन्य दरबारी तानसेन से जलने लगे। उन्होंने कुछ ऐसा षड्यंत्र रचा कि तानसेन खुद राग दीपक गाकर जल मरे। लेकिन तानसेन ने बुद्धि से इस षड्यंत्र को विफल कर तो दिया, परन्तु ---! पूरी कहानी आगे पढ़े। तानसेन बादशाह अकबर के बहुत प्रिय दरबारी बन गये थे। इनका असली नाम था तनु पांडे था। तानसेन का जन्म ग्वालियर में हुआ था। बादशाह उनकी बड़ी कद्र करते थे। राजकाज में भी उनकी बड़ी महत्वपूर्ण भूमिका होत...

डॉ. राजेन्द्र प्रसाद, भारत के प्रथम राष्ट्रपति, जीवन परिचय, Dr.Rajendra Prasad, first president of India , biography

चित्र
 डॉ. राजेन्द्र प्रसाद, भारत के प्रथम राष्ट्रपति, जीवन परिचय, Dr.Rajendra Prasad, first president of India , biography परीक्षार्थी परीक्षक से भी अधिक योग्य है, यह कथन यदि किसी भारतीय नेता के प्रशस्ति में कहे गए हैं तो वे हैं डॉ राजेंद्र प्रसाद। इनका जन्म 03 दिसंबर 1884 ई को बिहार राज्य के छपरा जिलांतर्गत जीरादेई नामक स्थान में हुआ था। इनकी प्रारम्भिक शिक्षा उर्दू - फारसी के माध्यम से हुई थी। 1902 ई में इन्होंने इंट्रेंस की परीक्षा में कलकत्ता विश्वविद्यालय में सर्वप्रथम स्थान प्राप्त किया था। फिर इन्होंने एफ . ए, बी. ए , एम . ए., एम. एल की उपाधियां प्राप्त की। डॉ. राजेन्द्र प्रसाद के मन में राजनीति के बीज विद्यार्थी जीवन से ही अंकुरित हो रहे थे। छात्र जीवन में ही इन्होंने कलकत्ता में छात्रों को संगठित करना प्रारंभ कर दिया था। कांग्रेस के लखनऊ अधिवेशन में महात्मा गांधी की नजर इन पर पड़। महात्मा गांधी के अचार विचार से ये काफी प्रभावित हुए। महात्मा गांधी के नेतृत्व में जब चंपारण आंदोलन प्रारंभ हुआ , तो राजेंद्र प्रसाद जी खूब बढ़ चढ़कर हिस्सा लिए। पटना के सदाकत आश्रम की स्थापना में इनका...