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नवंबर, 2021 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

सुभाष चंद्र बोस जीवनी, Subhash Chandra Bose biography, Azad Hind fauj

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    सुभाषचन्द्र बोस का जीवन परिचय a biography of Netaji Subhash Chandra Bose in hindi वीर प्रसूता जननी मां भारती के महान सपूत नेताजी सुभाष चन्द्र बोस का जन्म उड़ीसा के कटक नामक शहर में 23 जनवरी 1887 को हुआ था। इनके पिताजी श्री राजबहादुर जानकीनाथ बोस नगर के गणमान्य वकील तथा कटक नगर निगम और जिला बोर्ड के प्रधान थे। pradushan essay       (क्लिक करें और पढ़ें) सुभाषचन्द्र बोस की शिक्षा  चंद्र बोस की प्रारंभिक शिक्षा कटक में हुई थी। उन्होंने 1913 ई में मैट्रीक की परीक्षा उत्तीर्ण की। वे बचपन से ही पढ़ने में बड़े मेघावी थे।  मैट्रिक की परीक्षा के बाद उच्च शिक्षा के लिए वे कोलकाता के सुप्रसिद्ध  प्रेसिडेंसी कॉलेज में आ गये। 1919 ई में वे भारतीय सिविल सेवा परीक्षा देने लंदन गए। अपने कठोर परिश्रम और मेघाविता का परिचय देते हुए उन्होंने आई सी एस की परीक्षा उत्तीर्ण की। उनकी चतुराई और मेघाविता के बहुत किस्से मशहूर है।  कहते हैं, साक्षात्कार के समय एक अंग्रेज अफसर ने उन्हें एक अंगूठी दिखाते हुए कहा -- ' क्या सुभाषचन्द्र बोस इस अंगूठी से होकर निकल सकता है।...

सुमित्रानंदन पंत , Sumitranandan pant biography, chayawadi Kavi

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    सुमित्रानंदन पंत जी का जीवन परिचय सुमित्रा नंदन पंत का जन्म सन् 1900 में अल्मोड़ा (उत्तरांचल) जिले के कौसानी नामक स्थान में हुआ था।  इनका मूल नाम गोसाईं दत्त था।  पंत जी हिंदी साहित्य की प्रमुख प्रवृत्ति छायावाद के महत्त्वपूर्ण स्तम्भ माने जाते हैं।  पंत जी का जन्म स्थान प्राकृतिक वैभव से परिपूर्ण है, इसलिए उनकी कविताओं पर प्रकृति के अनुराग का स्पष्ट प्रभाव दिखाई देता है।  पंत जी में वास्तविकता के प्रतिकूल और दारुण रूप के अभाव का कारण भी कुछ सीमा तक प्रकृति के प्रभाव को माना जाता है।  उनके मन में प्रकृति के प्रति इतना मोह पैदा हो गया था कि ये जीवन की नैसर्गिक व्यापकता और अनेकरूपता में पूर्ण रूप से आसक्त न हो सके ---  छोड़ द्रुमों की मृदु छाया तोड़ प्रकृति से भी माया, बाले ते बाल जाल में कैसे उलझा दूं लोचन?  छोड़ अभी से इस जग को।  सुमित्रा नंदन पंत को प्रकृति का सुकुमार कवि कहा जाता है।  हिंदी कविता में प्रकृति को पहली बार प्रमुख विषय बनाने का काम पंत जी ने ही किया है।    सुमित्रा नंदन    पंत जी के जन्म क...

शहीद रामप्रसाद बिस्मिल , Shahid Ramprasad Bismil , biography

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 अमर शहीद रामप्रसाद बिस्मिल , Amar Shaheed Ramprasad Bismil, biography 19 दिसंबर, 1927 प्रातः साढ़े छः बजे का समय । गोरखपुर जेल से फांसी के तख्ते की ओर जाते हुए एक क्रांतिकारी हुंकार भरते हुए कह उठा -- " मालिक तेरी रज़ा रहे और तू ही तू रहे,  बाकी न मैं रहूं न मेरी आरज़ू रहे।  जब तक कि तन में जान, रगों में लहू रहे,  तेरा ही जिक्र या तेरी ही जुस्तजू रहे।।" फिर उसने अपनी इच्छा व्यक्त करते हुए कहा -- " मैं ब्रिटिश सरकार का विनाश चाहता हूं। " ये शब्द अमर शहीद रामप्रसाद बिस्मिल के हैं जब वे फांसी के फंदे पर झूलने जा रहे थे। राम प्रसाद बिस्मिल का जन्म 1897 ई में हुआ था। ऊर्दू की चौथी कक्षा पास करने के बाद जब वे पांचवीं कक्षा में पहुंच तब उनकी आयु 14 वर्ष की थी। बचपन में उन्हें कुछ बुरी आदतों ने घेर लिया था लेकिन उसी समय मुंशी इंद्रजीत से उनका मेल जोल हुआ और उन्होंने संध्या सीखी। बिस्मिल लिखते हैं -- "सत्यार्थ प्रकाश " के अध्ययन से मेरा काया पलट हो गया। उन्हीं दिनों शाहजहांपुर में स्वामी सोमदेव जी का आगमन हुआ। उनके भाषणों का मुझ पर अच्छा प्रभाव पड़। मैं धर्म - कर्...