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अकबर के नौ रत्नों का परिचय, Akbar ke nine Ratna

  अकबर के नौ रत्नों का संक्षिप्त परिचय अकबर मुगल वंश का तीसरा और प्रसिद्ध शासक था। उसने अपने दरबार में विभिन्न क्षेत्रों में पारंगत नौ लोगों की एक ऐसी टीम बनाई थी जिसे नौ रत्न कहा जाता है। आइए, अकबर के दरबार के नौ रत्नों के विषय में जानकारी प्राप्त करें। 1. बीरबल -- अकबर के नवरत्नों में बीरबल सबसे प्रसिद्ध थे। इनका जन्म काल्पी में 1528 ई में हुआ था। बीरबल ब्राह्मण थे। इनके बचपन का नाम महेश दास था। बीरबल एक कुशल वक्ता, कहानीकार, और कवि थे। बीरबल अकबर के बहुत नजदीक थे। इनकी योग्यता से प्रभावित होकर अकबर ने इन्हें कविराज, राजा की उपाधि प्रदान की थी। संसार में अकबर - बीरबल के किस्से मशहूर हैं। अकबर ने इन्हें न्याय विभाग का सर्वोच्च अधिकारी भी बनाया था। 1586 ई में यूसुफजाइयों के विद्रोह को दबाने के लिए गए बीरबल की हत्या कर दी गई। 2. अबुल फजल --  अबुल फजल का जन्म 1550 ई में हुआ था। इनके पिता सूफी शेख मुबारक थे। वह अकबर का मुख्य सलाहकार और सचिव था। उस इतिहास, दर्शन और साहित्य की भरपूर जानकारी प्राप्त थी। अकबर द्वारा चलाए दीन - एक - इलाही धर्म का मुख्य पुरोहित था। उसने आईने अकबरी और अ...

Krishn bhakt kavi aur Raskhan कृष्ण भक्त कवि और रसखान

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कृष्ण भक्त कवि और रसखान,     Krishan bhakt kavi aur Raskhan कृष्ण भक्त कवि और रसखान रसखान का जीवन परिचय कवि रसखान का असली नाम रसखान की रचनाएं रसखान की भाषा शैली रसखान द्वारा रचित पद हिन्दी साहित्य के भक्ति काल के प्रसिद्ध कवियों में कृष्ण भक्त कवि रसखान का नाम बहुत आदर के साथ लिया जाता है। मुसलमान कवियों ने भी हिन्दू देवी देवताओं का भजन कीर्तन करते हुए इनकी अनन्य श्रद्धा से भक्ति की है। रसखान का नाम ऐसे कवियों में अगली पंक्ति में लिया जाता है। कृष्ण भक्त होने के कारण इन्हें ब्रजभूमि से बहुत प्रेम था। यहां कृष्ण भक्त कवियों में रसखान का स्थान, रसखान का जीवन परिचय और ब्रजभूमि से उनके प्रेम के बारे में जानकारी प्राप्त करें। रसखान का असली नाम, रसखान की जन्म तिथि कृष्ण भक्त कवि रसखान का असली नाम सैयद इब्राहिम था। इनका जन्म 1548 ई में हुआ था। श्रीकृष्ण की लीलाओं और राधा - कृष्ण की प्रेम कहानी सुनकर ये इतने प्रभावित हुए कि ये श्रीकृष्ण के भक्त बन गये। इन्होंने अपना नाम रसखान रख लिया। रसखान जी स्वामी विट्ठल नाथ के शिष्य बन गये। उन्होंने स्वामी विट्ठल नाथ से दीक्षा लेकर ब्रज भूमि ...